Barclays Layoffs: AI के चलते 5,000 नौकरियों पर संकट! बैंक के इस फैसले से किन कर्मचारियों को लगेगा झटका?
ब्रिटेन के दिग्गज बैंक Barclays ने AI और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल के बीच हजारों नौकरियां खत्म करने का फैसला किया है. इस छंटनी से कई विभागों के कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है. आखिर किन लोगों की नौकरी पर सबसे ज्यादा खतरा है और बैंक ने इतना बड़ा फैसला क्यों लिया? जानिए पूरी डिटेल.

In Short
- Barclays ने AI और ऑटोमेशन के चलते करीब 5,000 नौकरियां खत्म करने का फैसला किया है, जो कुल वर्कफोर्स का लगभग 5% है.
- बैंक में 1,000 कर्मचारियों की छंटनी हो चुकी है, जबकि बाकी 4,000 नौकरियां चौथी तिमाही के अंत तक खत्म होंगी.
- - कुल छंटनी का करीब 60% असर बैक ऑफिस और सपोर्ट स्टाफ पर पड़ेगा, जिसमें सॉफ्टवेयर डेवलपर्स भी शामिल हैं.
Barclays Layoffs 2026: ब्रिटेन के बड़े बैंक बार्कलेज (Barclays) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन का इस्तेमाल बढ़ाने के बीच हजारों नौकरियां कम करने का फैसला किया है। बैंक अपने कामकाज को आसान बनाने और खर्च घटाने के लिए नई टेक्नोलॉजी पर जोर दे रहा है। इस फैसले से कई विभागों के कर्मचारियों पर असर पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि बैंक कितनी नौकरियां खत्म करने जा रहा है, किन कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा असर होगा और इसके पीछे क्या वजह है।
5,000 कर्मचारियों की होगी छंटनी
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बार्कलेज ने दुनियाभर में करीब 5,000 नौकरियां खत्म करने की योजना बनाई है। यह बैंक के कुल ग्लोबल वर्कफोर्स का लगभग 5% है। बैंक ने तीसरी तिमाही के फाइनेंशियल रिजल्ट के साथ इस फैसले की जानकारी दी। बैंक का कहना है कि AI और नई टेक्नोलॉजी की मदद से कामकाज को आसान बनाया जाएगा और फिक्स्ड कॉस्ट यानी नियमित खर्च को कम किया जाएगा।
1,000 कर्मचारियों की नौकरी जा चुकी
बैंक की चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) एना क्रॉस ने बताया कि प्रस्तावित 5,000 नौकरियों में से 1,000 की कटौती पहले ही हो चुकी है। बाकी 4,000 नौकरियां चौथी तिमाही के आखिर तक खत्म करने की योजना है। यानी बैंक आने वाले महीनों में छंटनी की प्रक्रिया पूरी करना चाहता है।
किन कर्मचारियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
इस छंटनी का सबसे ज्यादा असर बैंक के बैक ऑफिस और सपोर्ट डिपार्टमेंट पर पड़ने वाला है। कुल नौकरी कटौती में करीब 60% हिस्सेदारी इन्हीं विभागों की होगी। इनमें सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और जूनियर बैंकिंग सपोर्ट स्टाफ भी शामिल हैं। इन कर्मचारियों के कई रोजमर्रा के काम अब नई टेक्नोलॉजी और ऑटोमेशन की मदद से किए जा रहे हैं।
AI के कारण क्यों घटाई जा रही नौकरियां?
बार्कलेज के CEO सीएस वेंकटकृष्णन के मुताबिक, बैंकिंग सेक्टर में काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। AI की मदद से छोटे और नियमित कामों को पहले से ज्यादा आसानी से पूरा किया जा सकता है। बैंक इसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके अपने ऑपरेशंस को बेहतर बनाना चाहता है। इससे कर्मचारियों पर निर्भरता कम करने और खर्च बचाने में मदद मिल सकती है।
बैंक की कमाई में भी आई गिरावट
बार्कलेज के तीसरी तिमाही के नतीजे मिले-जुले रहे। बैंक के इक्विटी ट्रेडिंग कारोबार में बढ़त दर्ज हुई, लेकिन फिक्स्ड इनकम, करेंसी और कमोडिटी (FICC) ट्रेडिंग से होने वाली कमाई सालाना आधार पर 19% घटकर 1.01 अरब यूरो (रिपोर्ट में करीब 1.4 अरब डॉलर) रह गई। यह एनालिस्ट्स के अनुमान से कम रही। इसके पीछे ग्राहकों की ट्रेडिंग एक्टिविटी में कमी और मुश्किल आर्थिक हालात को वजह बताया गया।
क्या दूसरे बैंकों में भी बढ़ेगा AI का इस्तेमाल?
बार्कलेज का फैसला ग्लोबल बैंकिंग सेक्टर में आ रहे बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। वॉल स्ट्रीट समेत दुनियाभर के बड़े फाइनेंशियल संस्थान अब जेनरेटिव AI और एडवांस्ड ऑटोमेशन पर जोर दे रहे हैं। इनका मकसद खर्च कम करना और कर्मचारियों व दूसरे संसाधनों को उन कामों में लगाना है, जिनसे बैंक की कमाई बढ़ सके।