मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर ग्राहकों से 4 साल में ₹26,170 करोड़ वसूले, HDFC बैंक सबसे आगे
बैंक खाते में मिनिमम बैलेंस नहीं रखने की आदत कई ग्राहकों पर भारी पड़ी है। पिछले चार सालों में बैंकों ने एक बड़े अमाउंट की पेनल्टी वसूली है। आंकड़ों में सामने आया है कि इस मामले में कौन से बैंक सबसे आगे रहे और ग्राहकों को क्या राहत मिली, जानिए पूरी कहानी।

In Short
- चार साल में बैंकों ने मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर ग्राहकों से ₹26,170.37 करोड़ की पेनल्टी वसूली।
- FY 2025-26 में प्राइवेट बैंकों ने ₹4,948.71 करोड़ वसूले, जिसमें HDFC बैंक और Axis बैंक सबसे आगे रहे।
- RBI के नियमों के अनुसार बैंक चार्ज तय कर सकते हैं, लेकिन ग्राहक को पहले जानकारी देना जरूरी है।
बैंक अकाउंट में मिनिमम बैलेंस नहीं रखना कई ग्राहकों के लिए महंगा साबित हुआ है। पिछले कुछ सालों में बैंकों ने इस वजह से ग्राहकों से हजारों करोड़ रुपये की पेनल्टी वसूली है। संसदीय आंकड़ों से पता चला है कि इस चार्ज से बैंकों की कमाई लगातार बढ़ी है। आखिर कितनी बड़ी रकम ग्राहकों से ली गई और कौन से बैंक सबसे आगे रहे?
चार साल में वसूले गए ₹26,170 करोड़ से ज्यादा
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में बताया कि मिनिमम एवरेज बैलेंस (MAB) नहीं रखने पर बैंकों ने वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक ग्राहकों से कुल 26,170.37 करोड़ रुपये पेनल्टी के तौर पर वसूले हैं।
आंकड़ों के अनुसार, हर साल यह रकम बढ़ती गई। वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों ने ग्राहकों से 7,086.63 करोड़ रुपये जुर्माने के रूप में लिए। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में यह रकम 6,974.79 करोड़ रुपये थी। यानी सिर्फ दो साल में बैंकों ने 14 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की पेनल्टी वसूली।
इसमें प्राइवेट बैंकों ने सरकारी बैंकों के मुकाबले ज्यादा पेनल्टी वसूली।2/2
प्राइवेट बैंक रहे पेनल्टी वसूलने में आगे
वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, प्राइवेट बैंकों ने मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर ग्राहकों से कुल 4,948.71 करोड़ रुपये पेनल्टी के तौर पर वसूले।
इसमें HDFC बैंक सबसे आगे रहा। HDFC बैंक ने ग्राहकों से 1,798.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लिया। वहीं, Axis बैंक ने 1,081.33 करोड़ रुपये की पेनल्टी वसूली और वह दूसरे नंबर पर रहा।
वहीं, देश के सभी 12 सरकारी बैंकों ने मिलकर ग्राहकों से 2,137.92 करोड़ रुपये पेनल्टी के रूप में लिए। इनमें SBI ने 477.27 करोड़ रुपये और Bank of Baroda ने 394.1 करोड़ रुपये वसूले।हालांकि, ग्राहकों को राहत देने के लिए कई सरकारी बैंकों ने अब इन चार्ज को खत्म कर दिया है या फिर कम कर दिया है।
RBI के नियम क्या कहते हैं?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, बैंक अपनी बिजनेस पॉलिसी के हिसाब से मिनिमम बैलेंस चार्ज तय कर सकते हैं। हालांकि, यह चार्ज पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए और ग्राहकों को इसकी जानकारी दी जानी जरूरी है।
अगर किसी ग्राहक के खाते में मिनिमम बैलेंस तय सीमा से नीचे चला जाता है तो बैंक को तुरंत पैसा काटने के बजाय पहले ग्राहक को SMS, ईमेल या पत्र के जरिए जानकारी देनी होगी। इसके बाद ग्राहक को बैलेंस सुधारने के लिए समय देना जरूरी है।
SBI ने मार्च 2020 से सेविंग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर लगने वाली पेनल्टी को पूरी तरह खत्म कर दिया था। हालांकि, यह नियम चालू खातों या कुछ दूसरे खातों पर लागू नहीं था।
वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि देश के 12 सरकारी बैंकों में से 10 ने सेविंग अकाउंट पर मिनिमम बैलेंस पेनल्टी खत्म कर दी है, जबकि बाकी 2 बैंकों ने अपने चार्ज को कम कर दिया है।