क्या UPI पर लगेगा चार्ज? अशनीर ग्रोवर ने उठाए सवाल, आंकड़ों के साथ बताया किसे हो रहा फायदा

UPI चार्ज को लेकर बढ़ती चर्चा के बीच अशनीर ग्रोवर ने कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जुड़े फायदे और लागत को कैसे देखा जाना चाहिए। वहीं सरकार के नए नोटिफिकेशन के बाद भविष्य के चार्ज को लेकर बहस जारी है।

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In Short

  • अशनीर ग्रोवर ने UPI पर किसी भी संभावित लेवी को लेकर सवाल उठाए और इसे टैक्स कलेक्शन बताया।
  • सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक 2,000 रुपये तक के UPI ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगाया जा सकता।
  • NPCI की संभावित MDR गाइडलाइन के बाद साफ होगा कि बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर आगे क्या बदलाव होंगे।

By Gungun Mishra:

देश में UPI ट्रांजैक्शन पर संभावित चार्ज को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी बीच BharatPe के पूर्व को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर ने UPI पर किसी भी तरह की लेवी लगाने के तर्क पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आंकड़ों को देखने पर साफ पता चलता है कि UPI से किसे फायदा हो रहा है और किसे नुकसान।

अशनीर ग्रोवर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अगर कोई व्यक्ति कुछ मिनट आंकड़े देख ले तो उसे पूरी तस्वीर समझ आ जाएगी। उन्होंने कहा कि UPI को लेकर यह सवाल उठना चाहिए कि आखिर इससे नुकसान किसे हो रहा है और सरकार किस तरह की सब्सिडी दे रही है।

RBI और बैंकों के आंकड़ों का दिया हवाला

ग्रोवर ने अपने पोस्ट में कुछ आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस ट्रांसफर किया है। वहीं लिस्टेड बैंकों का कुल मुनाफा 4.11 लाख करोड़ रुपये रहा है और NPCI का प्री-टैक्स सरप्लस 1,888 करोड़ रुपये है।

उन्होंने सवाल किया कि जब UPI इकोसिस्टम से जुड़े संस्थान मजबूत स्थिति में हैं, तो फिर UPI से होने वाले कथित नुकसान की बात क्यों की जा रही है।

ग्रोवर ने यह भी कहा कि भारत में ATM चलाने और कैश लॉजिस्टिक्स की लागत करीब 30,500 करोड़ रुपये है। उनके मुताबिक अगर लागत कम करनी है तो ATM नेटवर्क को कम करके UPI को बढ़ावा दिया जा सकता है।

"UPI पर लेवी सिर्फ टैक्स कलेक्शन"

अशनीर ग्रोवर ने कहा कि UPI पर किसी भी तरह का चार्ज लगाना असल में सब्सिडी वापस लेने का मामला नहीं होगा, बल्कि यह एक तरह से टैक्स कलेक्शन जैसा होगा।

उन्होंने UPI को भारत की डिजिटल पेमेंट व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि इस सिस्टम को दुनियाभर में पहचान मिली है।

सरकार के नोटिफिकेशन में क्या कहा गया?

सरकार की ओर से 14 सितंबर को जारी नोटिफिकेशन में कहा गया कि बैंक और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर 2,000 रुपये तक के UPI ट्रांजैक्शन पर कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चार्ज नहीं लगा सकते।

यह नियम RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले पेमेंट पर भी लागू होगा। हालांकि, 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर इस नोटिफिकेशन के जरिए कोई नया चार्ज लागू नहीं किया गया है।

इस नोटिफिकेशन के बाद सवाल उठे हैं कि क्या भविष्य में कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू किया जा सकता है।

आम ग्राहकों को अभी नहीं देना होगा कोई शुल्क

फिलहाल आम UPI यूजर्स के लिए कोई बदलाव नहीं हुआ है। ग्राहक पहले की तरह QR कोड स्कैन करके बिना किसी फीस के पेमेंट कर सकेंगे। व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI ट्रांसफर भी फ्री रहेंगे।

सरकार पहले भी साफ कर चुकी है कि आम ग्राहकों से UPI इस्तेमाल करने का चार्ज नहीं लिया जाएगा। अगर भविष्य में MDR लागू होता है तो यह कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन तक सीमित हो सकता है।

NPCI तय करेगा आगे की प्रक्रिया

UPI को ऑपरेट करने वाली संस्था NPCI की ओर से MDR को लेकर विस्तृत ऑपरेशनल गाइडलाइन जारी होने की उम्मीद है। इसके बाद ही साफ होगा कि संभावित चार्ज किस तरह लागू होगा और इसका बोझ किस पर पड़ेगा।

फिलहाल UPI चार्ज को लेकर बहस इस बात पर केंद्रित है कि भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट नेटवर्क की लागत कौन उठाएगा और क्या UPI को खर्च के तौर पर देखा जाना चाहिए या फिर अर्थव्यवस्था के लिए बचत का जरिया।

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