बर्फीले समंदर में खुला कारोबार का नया रास्ता, भारत के लिए क्यों अहम बन रहा है आर्कटिक रूट?
आर्कटिक के बर्फीले रास्ते से वैश्विक कारोबार की तस्वीर बदल सकती है। बर्फ पिघलने के कारण खुल रहे इस समुद्री मार्ग पर रूस, चीन और अमेरिका की नजर है। यह रास्ता यूरोप और एशिया के बीच यात्रा समय कम कर सकता है, लेकिन इसके इस्तेमाल को लेकर कई चुनौतियां भी हैं।

In Short
- आर्कटिक समुद्री मार्ग करीब 5,600 किलोमीटर लंबा है और रूस के आर्कटिक तट के समानांतर चलता है।
- स्वेज नहर के रास्ते की तुलना में यह मार्ग करीब 18 से 20 दिन तक समय बचा सकता है।
- रूस भारत के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए इस नए समुद्री रास्ते के इस्तेमाल को अहम मान रहा है।
Arctic shipping: एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बीच समुद्री व्यापार के रास्तों में बदलाव की तैयारी हो रही है। आर्कटिक क्षेत्र में बर्फ पिघलने के कारण नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं, जिनका असर वैश्विक कारोबार पर पड़ सकता है। रूस और चीन समेत कई देश इस नए रास्ते को लेकर सक्रिय हैं।
आर्कटिक समुद्री मार्ग से बढ़ सकती है व्यापारिक गतिविधि
आर्कटिक समुद्री मार्ग के इस्तेमाल को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में इसकी भूमिका बढ़ सकती है। जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ पिघलने से यह रास्ता पहले के मुकाबले ज्यादा समय तक खुला रह सकता है।
यह मार्ग रूस के आर्कटिक तट के समानांतर चलता है और यूरोप को एशिया से जोड़ता है। इसकी लंबाई करीब 5,600 किलोमीटर है। पारंपरिक समुद्री रास्तों की तुलना में यह छोटा विकल्प माना जा रहा है।
स्वेज नहर के रास्ते से कम हो सकता है समय
आर्कटिक समुद्री मार्ग का सबसे बड़ा फायदा यात्रा समय में कमी को माना जा रहा है। मिस्र की स्वेज नहर से होकर जाने वाले रास्ते की तुलना में यह मार्ग करीब 18 से 20 दिन तक समय बचा सकता है।
इससे ईंधन की खपत कम हो सकती है और समुद्री व्यापार की गति बढ़ सकती है। अनुमान के मुताबिक, इस रास्ते से यूरोप और एशिया के बीच यात्रा में करीब 40 से 50 फीसदी तक समय की बचत हो सकती है। हालांकि, इस मार्ग का इस्तेमाल मौसम और बर्फ की स्थिति पर निर्भर करेगा।
रूस चाहता है भारत करे इस रास्ते का इस्तेमाल
रूस इस नए समुद्री मार्ग को भारत के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए अहम मान रहा है। रूस चाहता है कि भारत भी इस रास्ते का इस्तेमाल करे। रूस के मुताबिक, आर्कटिक समुद्री मार्ग दोनों देशों के बीच कारोबार को बढ़ावा दे सकता है और समुद्री परिवहन को आसान बना सकता है।
अमेरिका की भी बढ़ रही दिलचस्पी
इस नए समुद्री रास्ते पर अमेरिका की भी नजर है। अमेरिका आर्कटिक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।
ऊर्जा भंडार को लेकर भी बढ़ी रुचि
आर्कटिक क्षेत्र में तेल और गैस के बड़े भंडार होने की संभावना जताई जा रही है। इसी वजह से कई देशों की इस इलाके में रुचि बढ़ रही है।
हालांकि, इस क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों के साथ पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को लेकर भी चिंता बनी हुई है।