आंखों के मरीजों के लिए राहत की उम्मीद! भारत में ग्लूकोमा का नया इलाज लाने की तैयारी, Alcon ने बताया लॉन्च का प्लान

आंखों की बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली नई तकनीक को लेकर अमेरिकी कंपनी Alcon ने भारत के लिए बड़ी योजना बनाई है। कंपनी अगले साल ग्लूकोमा यानी काला मोतिया के इलाज से जुड़ा नया प्रोडक्ट लॉन्च कर सकती है। इसके साथ ही मोतियाबिंद के ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक लेंस पर भी जोर दिया जा रहा है। जानिए कंपनी की तैयारी।

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मोतियाबिंद के मरीजों के लिए नई तकनीक!
मोतियाबिंद के मरीजों के लिए नई तकनीक!

In Short

  • Alcon भारत में 2027 में ग्लूकोमा का नया इलाज पेश कर सकती है।
  • भारत में हर साल करीब 85 से 90 लाख मोतियाबिंद के ऑपरेशन होते हैं।
  • कंपनी ने भारत में नया PanOptix Pro ट्राइफोकल लेंस लॉन्च किया है।

By Shakshi:

अमेरिका की आई-केयर कंपनी Alcon भारत में आंखों के इलाज से जुड़े नए प्रोडक्ट लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। कंपनी अगले साल यानी 2027 में ग्लूकोमा (काला मोतिया) के इलाज के लिए नया प्रोडक्ट पेश कर सकती है। हालांकि, इसका लॉन्च सरकारी मंजूरी पर निर्भर करेगा। इसके अलावा कंपनी मोतियाबिंद के ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले नए लेंस, कॉन्टैक्ट लेंस और रेटिना सर्जरी से जुड़े प्रोडक्ट पर भी काम कर रही है।

ग्लूकोमा के इलाज के लिए क्या है कंपनी का प्लान?

Alcon India के कंट्री हेड अमर व्यास ने बिजनेस टुडे को बताया कि कंपनी अगले एक से दो साल में नए इंट्राऑक्यूलर लेंस (IOL) भी लॉन्च कर सकती है। हालांकि, उन्होंने ग्लूकोमा के नए इलाज का नाम या दूसरे प्रोडक्ट की लॉन्च तारीख नहीं बताई।

व्यास के मुताबिक, आंखों के इलाज से जुड़े कुछ उपकरणों को सरकारी मंजूरी मिलने में जरूरी दस्तावेज जमा करने के बाद करीब 6 से 9 महीने लग सकते हैं।

मोतियाबिंद के मरीजों के लिए क्या है खास?

भारत में हर साल करीब 85 से 90 लाख मोतियाबिंद के ऑपरेशन होते हैं। लेकिन इनमें ट्राइफोकल और टोरिक जैसे प्रीमियम लेंस का इस्तेमाल 3% से भी कम मामलों में होता है।

Alcon का अनुमान है कि अगले पांच साल में यह आंकड़ा करीब 10% तक पहुंच सकता है।

कंपनी ने 8 अक्टूबर को भारत में नया PanOptix Pro लेंस लॉन्च किया है। Alcon के मुताबिक, यह लेंस 94% रोशनी का इस्तेमाल करता है, जबकि पुराने PanOptix लेंस में यह आंकड़ा 88% था।

ट्राइफोकल लेंस पास, बीच और दूर की चीजें देखने में मदद करने के लिए बनाए जाते हैं। इससे मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद चश्मे पर निर्भरता कम हो सकती है। हालांकि, ये लेंस हर मरीज के लिए सही नहीं होते।

डॉक्टरों की ट्रेनिंग पर भी जोर

Alcon मरीजों को जागरूक करने और आंखों के डॉक्टरों को नई तकनीक की ट्रेनिंग देने पर भी काम कर रही है।

कंपनी ने Aravind Eye Hospital के साथ मिलकर पिछले दो साल में करीब 600 सर्जनों को मोतियाबिंद की सर्जरी से जुड़ी ट्रेनिंग दी है।

इसके अलावा कोयंबटूर में रेटिना सर्जनों के लिए एक ट्रेनिंग सेंटर बनाया गया है, जहां हर साल करीब 60 सर्जनों को प्रशिक्षण दिया जा सकता है।

भारत में कितना बड़ा है Alcon का कारोबार?

व्यास के मुताबिक, भारत में Alcon के कारोबार का करीब 85% हिस्सा सर्जिकल प्रोडक्ट से आता है, जबकि 15% हिस्सा विजन केयर का है।

कंपनी की फिलहाल भारत में कोई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट नहीं है और इसे शुरू करने की तत्काल योजना भी नहीं है।

वहीं, भारत में Alcon Global Services के कर्मचारियों की संख्या 2019 के करीब 100 से बढ़कर 1,700 से ज्यादा हो गई है। कंपनी अब यहां क्लिनिकल गतिविधियों से जुड़े काम भी बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रही है।

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