Air India की विदेशों में उड़ान बढ़ाने की तैयारी, और बड़े विमानों का दे सकती है ऑर्डर, CEO ने बताया पूरा प्लान
एयर इंडिया विदेशों में अपनी पकड़ मजबूत करने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने की तैयारी में है। कंपनी के CEO ने नए विमानों की खरीद, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के विस्तार और मुनाफे में लौटने की रणनीति बताई है। लेकिन एयरलाइन के सामने कई चुनौतियां हैं। जानिए क्या है पूरा प्लान।

In Short
- एयर इंडिया अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का नेटवर्क बढ़ाने के लिए और वाइडबॉडी विमान खरीदने की तैयारी कर रही है।
- कंपनी के सीईओ के मुताबिक, एयर इंडिया को उसकी पुरानी पहचान वापस दिलाने में 15 से 20 साल लग सकते हैं।
- वित्त वर्ष 2025-26 में एयर इंडिया को ₹22,000 करोड़ का घाटा हुआ, कंपनी ने निवेशकों से अतिरिक्त फंडिंग मांगी है।
एयर इंडिया आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का अपना नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी की नजर एक तरफ मुनाफे में आने पर है, तो दूसरी तरफ विदेशों में अपनी पकड़ मजबूत करने पर। एयर इंडिया के सीईओ टेवोल्डे गेब्रेमरियम ने एविएशन इंडिया समिट में बताया कि एयरलाइन ज्यादा वाइडबॉडी विमान खरीदने के लिए बातचीत कर रही है। इन विमानों के जरिए कंपनी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को बेहतर और प्रीमियम सुविधाएं देना चाहती है।
विदेशों में उड़ानें बढ़ाने की तैयारी
सीईओ गेब्रेमरियम के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एयर इंडिया की मौजूदगी अभी मांग के मुकाबले काफी कम है। कंपनी के पास यात्रियों की मांग तो है, लेकिन मौजूदा समस्याओं के कारण वह कई रूटों पर पूरी क्षमता से सेवाएं नहीं दे पा रही है।
उन्होंने बताया कि एयर इंडिया ने यूरोप के कई शहरों के साथ शिकागो, सैन फ्रांसिस्को और वॉशिंगटन जैसे रूटों पर उड़ानों की संख्या घटाई है। जैसे ही मौजूदा समस्याएं दूर होंगी, कंपनी इन रूटों पर फिर से ज्यादा विमान लगाएगी। उनका कहना है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय एयर इंडिया से यात्रा करना चाहते हैं।
और बड़े विमानों का ऑर्डर दे सकती है कंपनी
एयर इंडिया ने फरवरी 2023 में एयरबस और बोइंग से कुल 470 विमानों का ऑर्डर दिया था। इनमें वाइडबॉडी विमान भी शामिल थे। अब कंपनी ऐसे विमानों की संख्या और बढ़ाना चाहती है।
अगस्त 2026 में एयर इंडिया की कमान संभालने वाले गेब्रेमरियम इससे पहले इथियोपियन एयरलाइंस को मुश्किल दौर से निकालने के लिए जाने जाते हैं। उनका मानना है कि एयर इंडिया को उसकी पुरानी पहचान और प्रतिष्ठा वापस दिलाने में 15 से 20 साल लग सकते हैं।
मुनाफे में आने के लिए क्या है प्लान?
सीईओ ने साफ किया कि कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुनाफे में आना है। फिलहाल एयर इंडिया की प्रति उपलब्ध सीट किलोमीटर लागत, प्रति उपलब्ध सीट किलोमीटर कमाई से ज्यादा है। कंपनी को इस अंतर को कम करना होगा।
उन्होंने कहा कि एयर इंडिया की एक नजर आज की चुनौतियों पर है, जबकि दूसरी भविष्य की योजनाओं पर। वह खुद शेयरधारकों से भी ज्यादा जल्द कंपनी को मुनाफे में लाना चाहते हैं। इसके लिए कंपनी अपने अंदरूनी खर्चों को घटाने और कामकाज की क्षमता सुधारने पर ध्यान दे रही है।
₹22,000 करोड़ का घाटा, निवेशकों से मांगी मदद
वित्त वर्ष 2025-26 में एयर इंडिया को करीब 22,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। बढ़ती ईंधन लागत, पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने और वैश्विक अनिश्चितताओं ने कंपनी की मुश्किलें बढ़ाई हैं।
पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद होने के कारण एयर इंडिया अपने नेटवर्क में बदलाव भी कर रही है। कंपनी दिल्ली से पश्चिम की ओर जाने वाली कुछ उड़ानों को मुंबई और बेंगलुरु शिफ्ट कर रही है।
इन चुनौतियों के बीच एयर इंडिया ने अपने निवेशकों टाटा ग्रुप और सिंगापुर एयरलाइंस से अतिरिक्त फंडिंग भी मांगी है। कंपनी का लक्ष्य मौजूदा खर्चों को काबू में रखते हुए लंबी अवधि में अंतरराष्ट्रीय कारोबार का विस्तार करना है।