एयर इंडिया की वापसी का मिशन, नए CEO टेवोल्डे कार्गो कारोबार को बनाएंगे मजबूत

एयर इंडिया के नए CEO टेवोल्डे गेब्रेमारियम ने एयरलाइन को पटरी पर लाने के लिए अपनी प्राथमिकताएं तय कर ली हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार उनका फोकस कार्गो कारोबार बढ़ाने और विमान मेंटेनेंस से जुड़ी समस्याओं को कम करने पर है। एयर इंडिया इस समय घाटे और कई चुनौतियों से जूझ रही है।

Advertisement
AI Generated Image

In Short

  • एयर इंडिया के नए CEO टेवोल्डे गेब्रेमारियम 7 सितंबर से पद संभालेंगे और उनका फोकस कार्गो कारोबार बढ़ाने व मेंटेनेंस समस्याएं कम करने पर रहेगा।
  • ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के मुताबिक एयर इंडिया अपनी कार्गो क्षमता का औसतन सिर्फ 35% इस्तेमाल कर रही है, जिसे नए CEO बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।
  • घाटे और चुनौतियों से जूझ रही एयर इंडिया को मार्च तक के साल में 220 अरब रुपये का रिकॉर्ड नुकसान हुआ, जिसके बाद कंपनी में सुधार की जरूरत बढ़ी है।

By BT बाज़ार डेस्क:

एयर इंडिया के नए CEO टेवोल्डे गेब्रेमारियम ने कंपनी को घाटे से निकालने के लिए अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। वह एयर इंडिया के कार्गो कारोबार को बढ़ाने और विमानों से जुड़ी मेंटेनेंस समस्याओं को कम करने पर ध्यान दे रहे हैं।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया के नए CEO टेवोल्डे गेब्रेमारियम ने कर्मचारियों और मैनेजमेंट के साथ बातचीत में एयरलाइन की कार्गो क्षमता के कम इस्तेमाल और विमान रखरखाव से जुड़ी चुनौतियों को लेकर चिंता जताई है। वह 7 सितंबर से आधिकारिक रूप से CEO का पद संभालेंगे।

कार्गो क्षमता बढ़ाने पर रहेगा जोर

रिपोर्ट के मुताबिक, टेवोल्डे ने पाया कि एयर इंडिया अपनी कुल कार्गो क्षमता का औसतन केवल करीब 35 फीसदी ही इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कर्मचारियों से इस क्षेत्र में सुधार की योजना तैयार करने को कहा है।

टेवोल्डे का मानना है कि कार्गो कारोबार को मजबूत करके एयरलाइन की कमाई बढ़ाई जा सकती है। इससे पहले इथियोपियन एयरलाइंस में भी उन्होंने कार्गो सेक्टर पर फोकस किया था और वहां इस कारोबार को आगे बढ़ाने में सफलता मिली थी।

विमानों की मेंटेनेंस समस्या पर नजर

नए CEO ने एयर इंडिया के विमान रखरखाव यानी मेंटेनेंस से जुड़ी समस्याओं को कम करने के लिए भी योजना बनाने को कहा है। उन्होंने कहा कि एयरलाइन का बेड़ा बहुत पुराना नहीं है, ऐसे में मेंटेनेंस से जुड़ी दिक्कतों को कम किया जाना चाहिए।

घाटे और चुनौतियों से जूझ रही एयर इंडिया

एयर इंडिया इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। मार्च तक के साल में एयरलाइन को 220 अरब रुपये यानी करीब 2.3 अरब डॉलर का रिकॉर्ड घाटा हुआ था।

प्रतीकात्मक तस्वीर

इसके अलावा भारत के एविएशन रेगुलेटर ने पिछले साल एयर इंडिया में प्रतिस्पर्धी एयरलाइंस की तुलना में ज्यादा सुरक्षा संबंधी समस्याएं बताई थीं। घाटे के कारण एयर इंडिया ने टाटा ग्रुप और अपनी अल्पांश हिस्सेदार सिंगापुर एयरलाइंस से 1.1 अरब डॉलर की आर्थिक मदद मांगी थी।

टेवोल्डे के सामने बड़ी जिम्मेदारी

टेवोल्डे गेब्रेमारियम को इथियोपियन एयरलाइंस ग्रुप को अफ्रीका की सबसे बड़ी और मुनाफे वाली एयरलाइन बनाने के अनुभव के कारण चुना गया है। उनके सामने अब एयर इंडिया को मजबूत करने और कारोबार में सुधार लाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

आउटगोइंग CEO कैंपबेल विल्सन की योजनाओं को कई घटनाओं से झटका लगा था, जिसमें बोइंग 787 ड्रीमलाइनर हादसा, पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद होना और मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण उड़ानों पर असर शामिल है।

टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस अभी एयर इंडिया में प्रस्तावित निवेश को अंतिम रूप नहीं दे पाए हैं। वहीं सिंगापुर एयरलाइंस की बहुमत हिस्सेदार टेमासेक ने इस निवेश को लंबे समय के नजरिए से समर्थन दिया है।

Read more!
Advertisement