एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन में हिस्सेदारी पर मिल सकती है छूट? AAI के पास पहुंचा अनुरोध
एयरपोर्ट ऑपरेटरों के शेड्यूल एयरलाइंस में हिस्सेदारी रखने से जुड़े नियमों पर बहस तेज हो गई है। AAI को कॉन्ट्रैक्ट की पाबंदियों से छूट मांगने का अनुरोध मिला है, लेकिन नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने साफ किया है कि अभी इस मामले की जांच नहीं की गई है।

In Short
- AAI को एयरपोर्ट ऑपरेटरों के लिए शेड्यूल एयरलाइंस में इक्विटी से जुड़ी पाबंदियों से छूट का अनुरोध मिला
- नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि अभी इस अनुरोध की जांच नहीं की गई है
- इंडिगो के राहुल भाटिया ने एयरपोर्ट और एयरलाइन की क्रॉस-ओनरशिप से हितों के टकराव की चिंता जताई
AAI: देश में एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनियों के एयरलाइन बिजनेस में हिस्सेदारी रखने को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी AAI को एक अनुरोध मिला है। इसमें एयरपोर्ट ऑपरेटरों के लिए शेड्यूल एयरलाइंस में इक्विटी रखने से जुड़े कुछ कॉन्ट्रैक्ट नियमों से छूट मांगी गई है। हालांकि मंत्रालय ने साफ किया है कि अभी इस अनुरोध की जांच नहीं की गई है।
सरकार की सामान्य नीति में रोक नहीं
CPI(M) सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने पूछा था कि क्या सरकार उन नियमों में ढील देने पर विचार कर रही है, जिनके तहत बड़े एयरपोर्ट ऑपरेटरों के एयरलाइंस में बड़ी हिस्सेदारी रखने या उन्हें चलाने पर रोक लगती है।
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने जवाब दिया कि सरकार की ऐसी कोई सामान्य नीति नहीं है जो एयरपोर्ट ऑपरेटरों को शेड्यूल एयरलाइन में बड़ी हिस्सेदारी रखने या उसका संचालन करने से रोकती हो।
हालांकि PPP मॉडल के तहत चलने वाले कुछ एयरपोर्ट के मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट में इस तरह की पाबंदियां जरूर हैं। इनमें शेड्यूल एयरलाइंस और उनकी ग्रुप या सहयोगी कंपनियों के लिए कंसेशनेयर की इक्विटी रखने को लेकर सीमाएं तय की गई हैं।
AAI को मिला छूट का अनुरोध
मंत्री ने बताया कि AAI को ऐसे ही एक कॉन्ट्रैक्ट नियम से छूट देने का अनुरोध मिला है। लेकिन नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अभी इस मामले पर कोई जांच या फैसला नहीं किया है।
सांसद ने यह भी पूछा था कि अगर एयरपोर्ट ऑपरेटर और एयरलाइन के बीच क्रॉस-ओनरशिप होती है तो इसका कॉम्पिटिशन, स्लॉट आवंटन, एयरपोर्ट चार्ज, ग्राउंड हैंडलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर तक समान पहुंच पर क्या असर पड़ेगा। इस पर मंत्रालय ने कहा कि चूंकि मामले की जांच अभी नहीं हुई है, इसलिए ऐसा कोई आकलन सामने नहीं रखा गया है।
अडानी ग्रुप को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा
यह मामला उन रिपोर्टों के बीच सामने आया है, जिनमें कहा गया था कि अडानी ग्रुप ऐसे नियमों से छूट चाहता है। हालांकि अडानी ग्रुप ने साफ कहा है कि वह एयरलाइन बिजनेस में उतरने की किसी योजना पर विचार नहीं कर रहा है।
वहीं इंडिगो के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया ने इस तरह के बदलाव पर हितों के टकराव की चिंता जताई थी। उनका कहना था कि इससे आगे चलकर उपभोक्ताओं के हित प्रभावित हो सकते हैं।