सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी, भारत के ये 8 प्लांट बदल देंगे टेक्नोलॉजी का भविष्य
भारत में सेमीकंडक्टर मिशन तेजी से आगे बढ़ रहा है। गुजरात, असम, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में ₹1.6 लाख करोड़ के 8 बड़े चिप प्लांट लगाए जा रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स से मोबाइल, कार, एआई, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भारत की पकड़ मजबूत होने की उम्मीद है।

भारत में सेमीकंडक्टर यानी चिप बनाने की तैयारी तेजी से आगे बढ़ रही है। देश में गुजरात, असम, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में 8 बड़े प्लांट लगाए जा रहे हैं। इनका इस्तेमाल मोबाइल, कार, एआई, टेलीकॉम और कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में इस्तेमाल होने वाली चिप बनाने के लिए किया जाएगा।
गुजरात के साणंद में माइक्रोन का ₹22,516 करोड़ का प्रोजेक्ट भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का अहम हिस्सा है। इस प्लांट में चिप को शुरुआत से बनाने के बजाय उन्हें असेंबल, टेस्ट, मार्क और पैकेज किया जाएगा।
यहां डीआरएएम और नैंड मेमोरी प्रोडक्ट तैयार किए जाएंगे। ये छोटे कंपोनेंट मोबाइल फोन और ज्यादा डेटा इस्तेमाल करने वाले इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में काम आते हैं।
गुजरात के धोलेरा में भारत के चिप मिशन का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट तैयार हो रहा है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ताइवान की पीएसएमसी मिलकर ₹91,526 करोड़ का चिप प्लांट बना रहे हैं। इस प्लांट में हर महीने 50 हजार वेफर तैयार करने की क्षमता होगी। यहां बनने वाली चिप का इस्तेमाल कार, टेलीकॉम और आईटी सेक्टर में किया जाएगा।
आज की कारों में कई तरह की टेक्नोलॉजी इस्तेमाल होती है। सीजी पावर गुजरात में रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स और स्टार्स माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स के साथ मिलकर ₹7,584 करोड़ का प्रोजेक्ट लगा रही है। इस प्लांट में कार और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल वाली चिप तैयार की जाएंगी। इसकी क्षमता हर दिन 1.5 करोड़ से ज्यादा यूनिट बनाने की होगी।
ओडिशा के भुवनेश्वर में सिकसेम का ₹2,067 करोड़ का प्रोजेक्ट लगाया जा रहा है। इसका मकसद भारत का पहला कमर्शियल सिलिकॉन कार्बाइड फैब तैयार करना है। इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ज्यादा पावर वाले इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में तेजी से बढ़ रहा है। इस प्लांट में हर साल 60 हजार सिलिकॉन कार्बाइड वेफर बनाने और करीब 9.6 करोड़ यूनिट पैकेजिंग की क्षमता होगी।
अमेरिका की 3डी ग्लास सॉल्यूशंस ओडिशा के भुवनेश्वर में ₹1,943 करोड़ का प्लांट लगाएगी। इसमें ग्लास सब्सट्रेट और 3डी हेटेरोजीनियस इंटीग्रेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा। यह प्लांट एआई, एयरोस्पेस और फोटोनिक्स जैसे सेक्टर के लिए काम करेगा। इसकी योजना हर महीने 5,800 पैनल और 42 लाख पैकेज्ड यूनिट तैयार करने की है।