भारत में 7 नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्लान, मुंबई-पुणे 48 मिनट और चेन्नई-बेंगलुरु 73 मिनट में
भारत में बुलेट ट्रेन नेटवर्क को लेकर बड़ा प्लान तैयार हो रहा है। नए रूट से कई बड़े शहरों के बीच सफर का समय बेहद कम हो सकता है। सरकार एक खास डिजाइन और नई टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है। अब जानिए किन शहरों की दूरी सिमटने वाली है।

भारत में लंबी दूरी का रेल सफर आने वाले समय में पूरी तरह बदल सकता है। सरकार देश के बड़े शहरों को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी कर रही है। इसके लिए नए रूट, एक जैसा डिजाइन और भारत की जरूरतों के हिसाब से टेक्नोलॉजी तैयार की जा रही है। आइए समझते हैं कि ये कॉरिडोर कहां बनेंगे, सफर कितना घटेगा और इन्हें तैयार करने का पूरा प्लान क्या है।
यूनियन बजट 2026-27 में करीब 4,000 किलोमीटर लंबे सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का ऐलान किया गया है। इनमें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी रूट शामिल हैं। ये कॉरिडोर देश के पश्चिमी, दक्षिणी, उत्तरी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों के बड़े शहरों को आपस में जोड़ेंगे।
मुंबई से पुणे का सफर सिर्फ 48 मिनट में पूरा होने का अनुमान है। पुणे-हैदराबाद में 1 घंटा 55 मिनट, हैदराबाद-बेंगलुरु में करीब 2 घंटे और चेन्नई-बेंगलुरु में 1 घंटा 13 मिनट लगेंगे। हैदराबाद-चेन्नई का सफर 2 घंटे 55 मिनट, दिल्ली-वाराणसी का 3 घंटे 50 मिनट और वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी का सफर 2 घंटे 55 मिनट में पूरा हो सकेगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, NHSRCL सभी कॉरिडोर के लिए एक स्टैंडर्ड डिजाइन लाइब्रेरी तैयार कर रही है। इसमें वायाडक्ट, ब्रिज, टनल और स्टेशन के डिजाइन शामिल होंगे। मुंबई-अहमदाबाद प्रोजेक्ट में इस्तेमाल और टेस्ट किए गए मॉड्यूलर डिजाइन को दूसरे रूट पर भी अपनाया जाएगा। इससे हर कॉरिडोर के लिए नया डिजाइन बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और काम तेजी से कम कॉस्ट में पूरा होगा।
NHSRCL यह डिजाइन लाइब्रेरी भारत हाई स्पीड रेल प्रोग्राम के तहत तैयार कर रही है, जिसमें IIT टेक्निकल पार्टनर हैं। इसके साथ 350 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड संभालने वाला ट्रेन कंट्रोल सिस्टम भी बनाया जा रहा है। इसे भारत के मौसम और ऑपरेशनल कंडीशन के हिसाब से डिजाइन किया जाएगा। पहली बार भारत अपनी हाई-स्पीड रेल के लिए खुद के टेक्निकल स्टैंडर्ड तैयार करेगा।
नए कॉरिडोर के लिए 508 किलोमीटर लंबा मुंबई-अहमदाबाद रूट मॉडल बनेगा। इसका 47 किलोमीटर लंबा सूरत-बिलिमोरा हिस्सा 15 अगस्त 2027 से शुरू होगा। ठाणे-अहमदाबाद सेक्शन 2028 में और पूरा कॉरिडोर 2029 तक तैयार होगा। ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चलेगी और मुंबई से अहमदाबाद का सफर दो घंटे से कुछ ज्यादा समय में पूरा करेगी।
सात में से चार कॉरिडोर की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी DPR को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि बाकी तीन के लिए सर्वे चल रहा है। हर रूट को फाइनल अप्रूवल DPR के नतीजों, टेक्नो-इकोनॉमिक फीजिबिलिटी और फाइनेंसिंग के आधार पर मिलेगा। जापान की शिंकानसेन ट्रेन में इस्तेमाल होने वाली J-Slab बैलास्टलेस ट्रैक टेक्नोलॉजी को भी इन कॉरिडोर में अपनाने की योजना है।