ऑटो कंपनियां क्यों बढ़ा रही हैं गाड़ियों के दाम? जानिए इसकी बड़ी वजह
महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपनी SUV और कमर्शियल वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। आखिर ऑटो कंपनियां लगातार गाड़ियों के दाम क्यों बढ़ा रही हैं? पढ़िए पूरी खबर।

In Short
- महिंद्रा ने 10 जुलाई से SUV की कीमतों में 2.7% और कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 2% तक बढ़ोतरी का ऐलान किया।
- बढ़ती इनपुट कॉस्ट, महंगे कच्चे माल, सख्त सेफ्टी नियम और नए फीचर्स कीमत बढ़ने की प्रमुख वजह हैं।
- विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत मांग के चलते ऑटो कंपनियों में प्राइसिंग पावर लौट रही है, जिससे आगे भी कीमतें बढ़ सकती हैं।
महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) ने 10 जुलाई से अपने एसयूवी मॉडल्स की कीमतों में 2.7% और शुक्रवार से कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 2% तक बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब दूसरी ऑटो कंपनियां भी कीमतें बढ़ा रही हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि भारतीय ऑटो उद्योग अब बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने की स्थिति में है, जबकि मांग पर इसका बड़ा असर नहीं दिख रहा।
बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर आभा बकाया के सवालों का जवाब देते हुए जियोजित के प्रमुख निवेश रणनीतिकार, गौरांग शाह ने कहा कि ऑटो कंपनियों द्वारा गाड़ियों की कीमतों को बढ़ाना अनएक्सपेक्टेड (Unexpected) नहीं है। उनके मुताबिक, अगर ग्राहक एबीएस, एयरबैग, पावर स्टीयरिंग और चार या पांच-स्टार सुरक्षा रेटिंग जैसी सुविधाएं चाहते हैं, तो उनकी कीमत भी चुकानी होगी।
उनका मानना है कि ऑटो सेक्टर में यह एक बड़ा बदलाव है। एक ओर ग्राहक बेहतर फीचर्स वाली गाड़ियों की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नियामक संस्थाएं सुरक्षा मानकों को लगातार सख्त बना रही हैं। ऐसे में खासकर मास और मिड-मार्केट सेगमेंट में प्रति वाहन लागत लगातार बढ़ रही है।
कच्चे माल और कंपोनेंट्स भी हुए महंगे
सिर्फ सेफ्टी स्टैंडर्ड ही नहीं, बल्कि इनपुट कॉस्ट भी कंपनियों पर दबाव बढ़ा रही है। गौरांग शाह के अनुसार, हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रम के बाद कच्चे माल और इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स की लागत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
पिछले कुछ साल में ऑटो कंपनियां कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव, सप्लाई चेन की दिक्कतों और मांग में अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना कर चुकी हैं। ऐसे में अब कीमतें बढ़ाने की क्षमता इस बात का संकेत है कि बड़ी कंपनियां अपने मुनाफे की रक्षा करने के लिए पहले से बेहतर स्थिति में हैं।
मजबूत मांग से कंपनियों को मिला सहारा
कीमतें बढ़ने के बावजूद ऑटो सेक्टर की मांग मजबूत बनी हुई है। गौरांग शाह के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों के मंथली बिक्री आंकड़े काफी मजबूत रहे हैं। वहीं, चुनिंदा वाहन कैटेगरियों में निर्यात प्रदर्शन भी अच्छा बना हुआ है।
यही वजह है कि यूटिलिटी व्हीकल और कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में मध्यम स्तर की कीमत बढ़ोतरी को बाजार आसानी से स्वीकार कर सकता है। घरेलू मांग और रिप्लेसमेंट डिमांड कंपनियों के लिए सहारा बनी हुई है।
ऑटो सेक्टर के लिए क्या है संकेत?
महिंद्रा एंड महिंद्रा की यह कीमत बढ़ोतरी सिर्फ एक नियमित संशोधन नहीं मानी जा रही। यह संकेत है कि ऑटो उद्योग ऐसे दौर में प्रवेश कर सकता है, जहां प्रीमियम प्रोडक्ट्स, बेहतर सुरक्षा फीचर्स और मजबूत मांग के दम पर कंपनियां अपनी लाभप्रदता को बेहतर तरीके से बनाए रख सकें।
गौरांग शाह का कहना है कि काफी लंबे समय बाद ऑटो सेक्टर में प्राइसिंग पावर लौटती दिख रही है। यदि आने वाले महीनों में लागत का दबाव स्थिर रहता है, तो यह बदलाव ऑटो कंपनियों के लिए बेहतर कमाई के नए चक्र की शुरुआत साबित हो सकता है।