टाटा मोटर्स की कारों की कीमत बढ़ने की तैयारी! कंपनी ने बताया क्यों लेना पड़ सकता है प्राइस हाइक का फैसला
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स बढ़ती कमोडिटी कीमतों के दबाव से जूझ रही है। कंपनी ने संकेत दिए हैं कि मार्जिन सुधारने के लिए कारों की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की जा सकती है। EV सेगमेंट पर ज्यादा असर की संभावना जताई गई है, जबकि लागत घटाने के उपाय भी जारी हैं।

In Short
- टाटा मोटर्स PV कमोडिटी महंगाई के चलते कारों की कीमत बढ़ाने पर कर रही विचार
- पहली तिमाही में बढ़ी लागत से घरेलू मार्जिन पर पड़ा करीब 4.5% रेवेन्यू का असर
- EV कारों की कीमतों पर बढ़ोतरी का दबाव ICE वाहनों से ज्यादा हो सकता है
टाटा मोटर्स PV के MD और CEO शैलेश चंद्रा ने बताया कि पहली तिमाही में कमोडिटी कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर कंपनी के घरेलू मार्जिन पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि कमोडिटी की स्थिति पहली और दूसरी तिमाही में अब तक की सबसे चुनौतीपूर्ण स्थिति में रही है और दूसरी तिमाही में इसका असर इंडस्ट्री पर ज्यादा दिखाई दे सकता है।
कंपनी के मुताबिक, पहली तिमाही में कमोडिटी कॉस्ट बढ़ने से घरेलू मार्जिन पर करीब 4.5% रेवेन्यू का असर पड़ा है। इसे संभालने के लिए कंपनी कॉस्ट रिडक्शन और कीमतों में बढ़ोतरी दोनों विकल्पों पर काम कर रही है।
धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं कारों की कीमतें
शैलेश चंद्रा ने कहा कि ऑटो इंडस्ट्री में बढ़ी हुई लागत का असर तुरंत ग्राहकों पर नहीं डाला जाता है। पहले कंपनी कॉस्ट कम करने की कोशिश करती है और अगर कीमत बढ़ानी भी पड़ती है तो वह धीरे-धीरे और सोच-समझकर की जाती है।
टाटा मोटर्स PV ने इस साल पहले ही दो बार कीमतों में बढ़ोतरी की है। अप्रैल में ICE यानी पेट्रोल-डीजल कारों की कीमत बढ़ाई गई थी, जबकि 1 जुलाई 2026 से कंपनी ने अपने पैसेंजर व्हीकल पोर्टफोलियो में ICE और EV दोनों की कीमतों में 1.5% तक की बढ़ोतरी की थी।
ये खबर पढ़ना ना भूलें: Mahindra Scorpio Pikup का 14 अगस्त को होगा डेब्यू, SUV वाला लुक और 4WD से मचाएगी पिकअप सेगमेंट में हलचल
EV कारों पर ज्यादा असर की संभावना
टाटा मोटर्स के अनुसार, इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी EV सेगमेंट में कीमत बढ़ने की संभावना ज्यादा हो सकती है। शैलेश चंद्रा ने कहा कि EV में कमोडिटी महंगाई का असर ICE वाहनों की तुलना में थोड़ा ज्यादा हो सकता है।
हालांकि, कंपनी EV की लागत कम करने के लिए ज्यादा बड़े स्तर पर काम कर रही है। इसके लिए कुछ सब-सिस्टम के डिजाइन में बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे उत्पादन लागत को कम किया जा सके।
दूसरी तिमाही को लेकर कंपनी की चिंता
शैलेश चंद्रा ने कहा कि दूसरी तिमाही ऑटो इंडस्ट्री के लिए काफी मुश्किल रह सकती है और पहली छमाही में कमोडिटी कीमतों का दबाव काफी ज्यादा रहेगा। इसी वजह से कंपनी आगे कीमतों में बढ़ोतरी और लागत घटाने के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ने की योजना बना रही है।
टाटा मोटर्स का फोकस अब मार्जिन सुधारने के साथ ग्राहकों पर अचानक ज्यादा बोझ डालने से बचने पर है।