टाटा मोटर्स ने बदली रणनीति! छोटी कारों की बजाय अब इस सेगमेंट पर रहेगा पूरा फोकस
टाटा मोटर्स अपनी भविष्य की रणनीति में बड़ा बदलाव करने जा रही है। कंपनी अब सस्ती कारों के बजाय प्रीमियम सेगमेंट पर ज्यादा फोकस करेगी। इसके पीछे की वजह और इससे ग्राहकों व ऑटो बाजार पर क्या असर पड़ सकता है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट

टाटा मोटर्स अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। बिजनेस टुडे के एक रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी अब छोटी और किफायती कारों के बजाय प्रीमियम सेगमेंट पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करेगी।
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शैलेश चंद्रा ने इन्वेस्टर डे 2026 के दौरान इस नए विजन के बारे में बताया है। कंपनी की योजना है कि इस दशक के अंत तक छोटी कारों पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर दिया जाए।
छोटी कारों में चुनौतियां और मारुति का दबदबा
शैलेश चंद्रा ने स्पष्ट किया कि 10 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों के बाजार में अब वॉल्यूम ग्रोथ और मुनाफे की संभावनाएं सीमित होती जा रही हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि इस सेगमेंट में मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों का दशकों से दबदबा रहा है। मारुति ने पिछले 20 सालों में जो लागत क्षमता (cost position) डेवलप की है, उसकी बराबरी करना किसी भी दूसरी कंपनी के लिए बेहद कठिन काम है।
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चंद्रा के मुताबिक, जब एक कंपनी इतने लंबे समय से अपनी लागत को लगातार कम कर रही हो, तो वहां कीमतों के आधार पर मुकाबला करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि कुछ तकनीकी बदलावों के जरिए इस सेगमेंट में टिके रहना मुमकिन है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या वहां निवेश करना अब फायदेमंद है या नहीं। अभी टाटा मोटर्स की टियागो, पंच, टिगोर, अल्ट्रोज और नेक्सॉन जैसी गाड़ियां इसी किफायती सेगमेंट में आती हैं।
ब्रांड की वैल्यू पर रहेगा जोर
कंपनी अब केवल कॉस्ट की लड़ाई नहीं लड़ना चाहती, बल्कि ब्रांड के जरिए वैल्यू बनाने पर काम कर रही है। शैलेश चंद्रा ने माना कि साल 2020 की तुलना में आज टाटा मोटर्स की ब्रांड इमेज में काफी सुधार आया है। फिलहाल ग्राहक टाटा मोटर्स को सुरक्षा, शानदार डिजाइन और टेक्नोलॉजी के लिए पहचानने लगे हैं।
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चंद्रा ने उम्मीद जताई कि आने वाले सालों में जब कंपनी सर्विस और क्वालिटी पर अपनी पकड़ और मजबूत कर लेगी, तब तक वह ग्राहकों के बीच एक प्रीमियम ब्रांड के तौर पर स्थापित हो जाएगी। इस नई रणनीति का मकसद यह है कि भविष्य में टाटा मोटर्स किसी भी सेगमेंट में अपनी कारों के लिए बेहतर प्रीमियम कीमत वसूल सके।