AI Deepfake पर नितिन गडकरी का बड़ा एक्शन, ₹11 करोड़ हर्जाने की मांग; जानें क्या है पूरा मामला
नितिन गडकरी ने AI डीपफेक और सोशल मीडिया पर वायरल फर्जी कंटेंट के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने ₹11 करोड़ हर्जाना मांगते हुए कई बड़े प्लेटफॉर्म्स को कोर्ट में चुनौती दी है। आखिर पूरा विवाद क्या है? पढ़िए पूरी खबर।

In Short
- नितिन गडकरी ने AI से बने फर्जी वीडियो और पोस्ट के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
- E20 योजना से अपना कोई संबंध नहीं बताते हुए ₹11 करोड़ हर्जाने की मांग की।
- Meta, X और Google समेत कई प्लेटफॉर्म से कथित फर्जी कंटेंट हटाने की मांग की गई।
Nitin Gadkari Defamation Case: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर बनाए गए कथित AI डीपफेक, वीडियो, पोस्ट और मीम्स के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया है।
आज तक की रिपोर्टर विद्या के अनुसार, गडकरी ने इन फर्जी कंटेंट को हटाने की मांग की है और साथ ही मामले में शामिल पक्षों से ₹11 करोड़ के हर्जाने की मांग भी की है।
E20 योजना से खुद को बताया पूरी तरह अलग
86 पन्नों की याचिका में नितिन गडकरी ने कहा है कि उनका E20 एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) से किसी भी तरह का संबंध नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि न तो वह इस योजना के प्रभारी मंत्री हैं और न ही किसी कार्यकारी, वैधानिक, नियामक या वित्तीय भूमिका में शामिल हैं।
याचिका में कहा गया है कि E20 कार्यक्रम का संचालन और नीति निर्माण पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) करता है, जबकि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय इससे अलग है।
E20 को लेकर लगाए गए आरोपों को बताया गलत
गडकरी ने अदालत में कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल कई पोस्ट, वीडियो और मीम्स में उन्हें E20 पेट्रोल लागू करने वाला बताया गया है। कुछ पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि E20 की वजह से वाहनों को नुकसान हो रहा है और इससे उनके परिवार को आर्थिक लाभ मिला है।
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याचिका के अनुसार, ये सभी आरोप गलत हैं और सरकारी रिकॉर्ड भी बताते हैं कि E20 कार्यक्रम का संचालन सड़क परिवहन मंत्रालय नहीं, बल्कि पेट्रोलियम मंत्रालय करता है।
Meta, X और Google समेत कई के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की
नितिन गडकरी ने AI डीपफेक मामले में Meta (Facebook और Instagram), X, Google/YouTube समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और सरकारी विभागों के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इसके अलावा कुछ अज्ञात यूजर्स को भी मामले में शामिल किया गया है। गडकरी ने कोर्ट से फर्जी वीडियो, तस्वीरों और पोस्ट को हटाने की मांग की है।
व्यक्तित्व अधिकारों के उल्लंघन का भी लगाया आरोप
याचिका में 26 ऐसे लिंक का जिक्र किया गया है, जिनमें कथित तौर पर फेस-स्वैप वीडियो, AI से बनाई गई तस्वीरें और कार्टून शामिल हैं। गडकरी का कहना है कि उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, चेहरे, आवाज और हाव-भाव का इस्तेमाल किया गया, जिससे उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
आलोचना पर नहीं, फर्जी कंटेंट पर है आपत्ति
नितिन गडकरी ने कहा है कि उन्हें नीतियों या सार्वजनिक जीवन की निष्पक्ष और ईमानदार आलोचना से कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन याचिका में जिन पोस्ट का जिक्र किया गया है, उनमें कथित तौर पर अभद्र भाषा, फर्जी बयान, AI से तैयार वीडियो और तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है, जो वैध राजनीतिक आलोचना या व्यंग्य की सीमा से बाहर है।
मंगलवार को होगी सुनवाई
इस मामले में गडकरी की ओर से अधिवक्ता संदीप लड्डा पैरवी करेंगे। मामले की सुनवाई जस्टिस आरिफ एस. डॉक्टर की बेंच के सामने मंगलवार को होगी। कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई के दौरान AI डीपफेक कंटेंट, सोशल मीडिया पोस्ट और उन्हें हटाने की मांग से जुड़े मुद्दों पर विचार किया जाएगा।