हाईवे निर्माण की क्वालिटी पर NHAI सख्त! 17 नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स की होगी स्पेशल जांच
देश में बन रहे 17 नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स अब NHAI की खास निगरानी में आ गए हैं। इन प्रोजेक्ट्स के टेंडर अनुमानित लागत से 15% से ज्यादा कम कीमत पर दिए गए थे। अब 39 अनुभवी इंजीनियर निर्माण की क्वालिटी जांचेंगे और कमी मिलने पर सुधार की कार्रवाई की जाएगी।

In Short
- NHAI करेगा 17 निर्माणाधीन नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स की स्पेशल क्वालिटी जांच।
- 500 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत और 15% से अधिक कम बोली वाले प्रोजेक्ट्स किए गए शामिल।
- 39 अनुभवी और रिटायर्ड इंजीनियरों के नेतृत्व में दिसंबर 2026 तक पूरी होगी पहले दौर की जांच।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI देश में बन रहे 17 नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स की स्पेशल क्वालिटी जांच करने जा रहा है। ये सभी ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिनके लिए लगाई गई बोली अनुमानित प्रोजेक्ट लागत से 15 प्रतिशत से भी ज्यादा कम थी। NHAI इस जांच के जरिए निर्माण की क्वालिटी से जुड़ी कमियों का शुरुआती दौर में ही पता लगाना चाहता है, ताकि समय रहते जरूरी सुधार किए जा सकें।
इन प्रोजेक्ट्स की पहले दौर की जांच दिसंबर 2026 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके छह महीने बाद इनकी दोबारा जांच होगी। खास बात यह है कि दूसरी जांच विशेषज्ञों की अलग टीम करेगी।
इन 17 प्रोजेक्ट्स को क्यों चुना गया?
NHAI ने इन प्रोजेक्ट्स को चुनने के लिए तीन पैमाने तय किए हैं। इनमें प्रोजेक्ट की निर्माण लागत 500 करोड़ रुपये से ज्यादा होना, टेंडर में 15 प्रतिशत से ज्यादा डिस्काउंट होना और प्रोजेक्ट का काम 35 प्रतिशत से 80 प्रतिशत के बीच पूरा होना शामिल है।
चुने गए प्रोजेक्ट्स में ग्रीनफील्ड और एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर, बायपास के साथ फोर और सिक्स लेनिंग से जुड़े काम शामिल हैं।
ये प्रोजेक्ट कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और उत्तर प्रदेश में हैं।
39 अनुभवी इंजीनियर संभालेंगे जिम्मेदारी
NHAI ने इस स्पेशल जांच के लिए एक्सपर्ट्स का एक पूल तैयार किया है। जांच करने वाली टीमों का नेतृत्व 39 अनुभवी और रिटायर्ड इंजीनियर करेंगे।
इन इंजीनियरों में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, रेल मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और राज्यों के लोक निर्माण विभाग यानी PWD जैसे सरकारी संगठनों से जुड़े रहे एक्सपर्ट्स शामिल हैं। जांच के दौरान टीमों की मदद के लिए टेक्निकल एक्सपर्ट भी मौजूद रहेंगे।
किन चीजों की होगी जांच?
जांच टीमें हाईवे के निर्माण कार्य को मंजूर किए गए ड्रॉइंग, टेक्निकल स्पेसिफिकेशन, कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों और प्रोजेक्ट के लिए तय क्वालिटी प्लान के आधार पर परखेंगी।
इसके अलावा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले मटेरियल की क्वालिटी, काम की गुणवत्ता, निर्माण के तरीकों और सैंपलिंग व टेस्टिंग से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी।
जहां लागू होगा, वहां रोड सेफ्टी से जुड़े उपायों, ट्रैफिक मैनेजमेंट और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की भी समीक्षा की जाएगी।
कमी मिलने पर होगा सुधार
जांच में अगर किसी तरह की कमी सामने आती है तो संबंधित कॉन्ट्रैक्ट के प्रावधानों के तहत उसमें सुधार के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
NHAI के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया से बार-बार सामने आने वाली क्वालिटी से जुड़ी समस्याओं और निर्माण के तरीकों की पहचान करने में भी मदद मिलेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि किन मामलों में कॉन्ट्रैक्टर्स, कंसल्टेंट्स और प्रोजेक्ट से जुड़े दूसरे पक्षों की ज्यादा जवाबदेही तय करने की जरूरत है।