मिडल ईस्ट युद्ध से भारत में गाड़ियों की किल्लत, आधे से ज्यादा डीलरों के पास स्टॉक की कमी - रिपोर्ट
मिडल ईस्ट तनाव का असर भारत के ऑटो सेक्टर पर दिख रहा है, जहां 50% से ज्यादा डीलर सप्लाई में देरी झेल रहे हैं। रिकॉर्ड बिक्री के बावजूद पार्ट्स की कमी, बढ़ती लागत और वैश्विक अनिश्चितता चिंता बढ़ा रही है, जिससे ग्राहकों और डीलरों दोनों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध की आग अब भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर तक पहुंच गई है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के मुताबिक, देश के आधे से ज्यादा (करीब 53.2%) डीलर गाड़ियों की सप्लाई में देरी का सामना कर रहे हैं।
फाडा ने चेतावनी दी है कि लगभग 17 प्रतिशत डीलरों को तो तीन हफ्ते या उससे भी ज्यादा का इंतजार करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा असर कमर्शियल गाड़ियों पर पड़ा है, लेकिन कार और टू-व्हीलर के खास मॉडल्स की डिलीवरी में भी देरी हो रही है।
रिकॉर्ड बिक्री के बाद सप्लाई का संकट
यह संकट ऐसे समय आया है जब भारतीय ऑटो बाजार अपनी सबसे शानदार फॉर्म में था। वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार द्वारा जीएसटी (GST) दरों में कटौती के बाद छह में से पांच वाहन श्रेणियों ने बिक्री के नए रिकॉर्ड बनाए थे।
फाडा के अध्यक्ष सी.एस. विग्नेश्वर का कहना है कि 'जीएसटी 2.0' के लागू होने से आम आदमी की पहुंच में आने वाली छोटी कारों और टू-व्हीलर्स की बिक्री में जबरदस्त उछाल आया था। पिछले साल टू-व्हीलर्स की 2.14 करोड़ से ज्यादा यूनिट्स बिकीं, जबकि पैसेंजर गाड़ियों ने पहली बार 47 लाख का आंकड़ा पार किया।
खेती और व्यापार में भी दिखी थी चमक
बीते साल ट्रैक्टरों की मांग ने भी इतिहास रच दिया और पहली बार 10 लाख से ज्यादा ट्रैक्टर बिके। बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के काम में तेजी आने से कमर्शियल वाहनों की बिक्री भी 10 लाख के पार रही।
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का क्रेज भी बढ़ा है, खासकर थ्री-व्हीलर सेगमेंट में जहां 60 प्रतिशत से ज्यादा बिक्री बिजली से चलने वाले वाहनों की रही। दिलचस्प बात यह है कि शहरों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में कारों की मांग 17 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी, जो शहरी इलाकों की 10 प्रतिशत ग्रोथ से कहीं ज्यादा है।
डीलर और ग्राहकों की बढ़ी चिंता
फाडा ने आने वाले समय के लिए तीन बड़े खतरों की ओर इशारा किया है। सी.एस. विग्नेश्वर के अनुसार, 40 प्रतिशत डीलर आर्थिक सुस्ती और ग्राहकों के कमजोर उत्साह को लेकर डरे हुए हैं। वहीं, 30 प्रतिशत डीलर युद्ध की वजह से पार्ट्स की कमी और सप्लाई चेन टूटने से परेशान हैं। तीसरा बड़ा डर पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का है। अगर मिडल ईस्ट का तनाव और खिंचा, तो ईंधन महंगा होगा जिससे लोग नई गाड़ी खरीदने का फैसला टाल सकते हैं। फिलहाल अप्रैल का महीना मार्च के मुकाबले थोड़ा सुस्त रहने की उम्मीद है।