ईवी के दौर में भी बढ़ रही डीजल कारों की डिमांड, Mercedes-Benz ने जारी किए चौंकाने वाले आंकड़े

भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती मांग के बीच Mercedes-Benz की डीजल गाड़ियों की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। 2026 में यह 38% से बढ़कर 40% पहुंच गई। कंपनी का कहना है कि डीजल की मांग में फिलहाल गिरावट के संकेत नहीं हैं और ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक पेट्रोल, डीजल, इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड विकल्प जारी रहेंगे।

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Mercedes-Benz की डीजल कारों की बढ़ती डिमांड
Mercedes-Benz की डीजल कारों की बढ़ती डिमांड

In Short

  • Mercedes-Benz की डीजल कारों की हिस्सेदारी 38% से बढ़कर 40% हुई
  • जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी की EV बिक्री में 16% की बढ़ोतरी हुई
  • - Mercedes-Benz ग्राहकों की मांग के हिसाब से अलग-अलग पावरट्रेन विकल्प जारी रखेगी

By Shakshi:

भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती मांग के बावजूद Mercedes-Benz की डीजल कारों की हिस्सेदारी बढ़ी है। Mercedes-Benz India के मुताबिक, 2026 में कंपनी की डीजल गाड़ियों की हिस्सेदारी बढ़कर 40% हो गई है, जो पिछले साल 38% थी। वहीं जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी की इलेक्ट्रिक व्हीकल बिक्री में 16% की बढ़ोतरी हुई है।

Mercedes-Benz India के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO संतोष अय्यर ने कहा कि कंपनी के मामले में डीजल की मांग 38% से बढ़कर 40% हो गई है। उनके मुताबिक, कंपनी को फिलहाल डीजल की मांग में किसी तरह की गिरावट नजर नहीं आ रही है।

EV और Plug-in Hybrid पर भी कंपनी का फोकस

डीजल की हिस्सेदारी ऐसे समय बढ़ी है, जब Mercedes-Benz भारत में अपने इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही है। कंपनी की EV बिक्री 2026 के पहले नौ महीनों में 16% बढ़ी है।

इसके अलावा कंपनी E 53 और S-Class जैसे मॉडल्स के प्लग-इन हाइब्रिड वर्जन पेश कर चुकी है और अब Mercedes-Maybach S 580e भी लॉन्च किया गया है।

संतोष अय्यर के मुताबिक, कंपनी यह नहीं मानती कि एक पावरट्रेन तुरंत दूसरे की जगह ले लेगा। पेट्रोल, डीजल, प्लग-इन हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक, सभी की अपनी खूबियां और कमियां हैं। इसलिए Mercedes-Benz किसी एक टेक्नोलॉजी पर निर्भर रहने के बजाय ग्राहकों की मांग के हिसाब से अलग-अलग विकल्प देती रहेगी।

Plug-in Hybrid को लेकर क्या बोले संतोष अय्यर?

अय्यर के मुताबिक, अलग-अलग ग्राहकों की जरूरतें भी अलग होती हैं। EV उन ग्राहकों के लिए विकल्प हो सकती है, जो जीरो-एमिशन ड्राइविंग और कम रनिंग कॉस्ट चाहते हैं। वहीं चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और रेंज को लेकर चिंतित ग्राहकों के लिए प्लग-इन हाइब्रिड बीच का विकल्प हो सकता है।

उन्होंने कहा कि प्लग-इन हाइब्रिड दोनों टेक्नोलॉजी का फायदा देती हैं। इसमें 100 किलोमीटर से ज्यादा की प्योर इलेक्ट्रिक ड्राइविंग रेंज मिल सकती है और अगर कार चार्ज नहीं हो पाए तो कम्बशन इंजन का इस्तेमाल किया जा सकता है।

CAFE 3 नियमों का किया स्वागत

संतोष अय्यर ने CAFE 3 नियमों का भी स्वागत किया। ये नियम वाहन कंपनियों को अपने फ्लीट की एफिशिएंसी जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग पावरट्रेन का मिश्रण तय करने में ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी देते हैं।

अय्यर ने कहा कि आखिर में लक्ष्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ना है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए एक रास्ता होना जरूरी है। बाजार की वास्तविक मांग तभी समझ आएगी, जब ग्राहकों को सभी पावरट्रेन के विकल्प दिए जाएँ।

हालांकि Mercedes-Benz भारत में S-Class का डीजल पावरट्रेन ऑफर नहीं करती है।

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