2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये का होगा भारत का EV बाजार, 5 करोड़ नौकरियां बनने की उम्मीद: गडकरी
भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है और इससे 5 करोड़ नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। नितिन गडकरी के मुताबिक देश में EV की हिस्सेदारी बढ़ रही है, जबकि इलेक्ट्रिक बस मैन्युफैक्चरिंग और कम लॉजिस्टिक्स कॉस्ट से भी ग्रोथ को सहारा मिलेगा।

In Short
- 2030 तक भारत का EV मार्केट 20 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है।
- इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर से 5 करोड़ नौकरियां बनने की उम्मीद है।
- सरकार भारत की ऑटो इंडस्ट्री को अगले 5 साल में दुनिया की नंबर 1 इंडस्ट्री बनाना चाहती है।
भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार आने वाले सालों में तेजी से बढ़ सकता है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि 2030 तक देश का EV मार्केट 20 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है और इससे करीब 5 करोड़ नौकरियां पैदा हो सकती हैं।
PTI के मुताबिक, गडकरी ने CII-ITC Centre of Excellence for Sustainable Development की ओर से आयोजित एक समिट में यह बात कही।
देश में अभी 57 लाख रजिस्टर्ड इलेक्ट्रिक वाहन
गडकरी ने बताया कि इस समय भारत में 57 लाख रजिस्टर्ड इलेक्ट्रिक वाहन हैं। कुल वाहन बाजार में EV की हिस्सेदारी करीब 7 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि 2030 तक भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट 20 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है और इससे 5 करोड़ नौकरियां बनने की संभावना है।
इलेक्ट्रिक बसों में बड़ा मौका
गडकरी ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की काफी संभावना है, खास तौर पर इलेक्ट्रिक बस सेगमेंट में। देश में हर साल करीब 1 लाख इलेक्ट्रिक बसों की मांग है, लेकिन फिलहाल भारत में सिर्फ 50,000 से 60,000 इलेक्ट्रिक बस बनाने की क्षमता है। ऐसे में इस सेगमेंट में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की बड़ी गुंजाइश है।
5 साल में दुनिया की नंबर 1 ऑटो इंडस्ट्री बनाने का लक्ष्य
गडकरी ने सरकार के उस लक्ष्य को भी दोहराया, जिसके तहत भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को अगले 5 साल में दुनिया की सबसे बड़ी ऑटो इंडस्ट्री बनाना है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं है।
14 लाख करोड़ से बढ़कर 23 लाख करोड़ रुपये की हुई इंडस्ट्री
गडकरी के मुताबिक, जब उन्होंने सड़क परिवहन मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली थी तब भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का आकार करीब 14 लाख करोड़ रुपये था।
अब यह बढ़कर करीब 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है और मौजूदा समय में इंडस्ट्री का आकार लगभग 23 लाख करोड़ रुपये है। तुलना करें तो अमेरिका की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का आकार करीब 78 लाख करोड़ रुपये और चीन का करीब 47 लाख करोड़ रुपये है।
भारत के पास मजबूत मैन्युफैक्चरिंग बेस
गडकरी ने कहा कि भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री आगे और तेजी से बढ़ने की मजबूत स्थिति में है। इसकी बड़ी वजह देश में प्रशिक्षित मैनपावर, कम मैन्युफैक्चरिंग लागत और दुनिया की बड़ी ऑटो कंपनियों की मौजूदगी है।
उन्होंने भारतीय कंपनियों की एक्सपोर्ट ताकत का भी जिक्र किया। गडकरी के मुताबिक, Bajaj Auto और Hero MotoCorp अपने कुल उत्पादन का आधे से ज्यादा हिस्सा एक्सपोर्ट करते हैं।
फॉसिल फ्यूल इंपोर्ट कम करने में EV की बड़ी भूमिका
गडकरी ने कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की तरफ बढ़ना भारत के लिए सिर्फ ऑटो सेक्टर की ग्रोथ का मामला नहीं है, बल्कि इससे फॉसिल फ्यूल के इंपोर्ट पर निर्भरता भी कम हो सकती है।
भारत फिलहाल फॉसिल फ्यूल के इंपोर्ट पर करीब 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है। इसके अलावा फॉसिल फ्यूल देश में प्रदूषण की समस्या भी बढ़ाते हैं। इसी वजह से सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के साथ-साथ वैकल्पिक ईंधन को भी बढ़ावा दे रही है।
लॉजिस्टिक्स कॉस्ट 16 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत
सरकार देश की ग्लोबल प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करने पर भी काम कर रही है। गडकरी के मुताबिक, एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर के विस्तार से भारत की लॉजिस्टिक्स कॉस्ट पहले के 16 प्रतिशत से घटकर करीब 10 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने IIT Chennai, IIT Kanpur और IIM Bangalore की ओर से तैयार एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह जानकारी दी।
अब 8 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य
सरकार अब लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को और घटाकर 8 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रख रही है। कम लॉजिस्टिक्स कॉस्ट से भारतीय इंडस्ट्री को ग्लोबल मार्केट में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही कम लागत, मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और बढ़ता EV बाजार आने वाले सालों में भारत की ऑटो इंडस्ट्री की ग्रोथ में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।