E20 पेट्रोल से घट रहा है कार का माइलेज? जानें घर बैठे कैसे चेक करें असली फ्यूल एफिशिएंसी
E20 पेट्रोल और कार के माइलेज को लेकर चल रही बहस के बीच बड़ा सवाल यह है कि गाड़ी की असली फ्यूल एफिशिएंसी कैसे पता करें। डैशबोर्ड की रीडिंग हमेशा पूरी तरह सटीक नहीं होती, जबकि एक आसान टैंक-टू-टैंक तरीका ज्यादा भरोसेमंद अंदाजा दे सकता है।

In Short
- E20 पेट्रोल और माइलेज को लेकर गडकरी के बयान के बाद तेज हुई चर्चा
- डैशबोर्ड पर दिखने वाला माइलेज सिर्फ एक अनुमान हो सकता है
- टैंक-टू-टैंक तरीके से खुद चेक किया जा सकता है कार का ऑन-रोड माइलेज
E20 petrol mileage: E20 पेट्रोल और उससे गाड़ियों की फ्यूल एफिशिएंसी पर पड़ने वाले असर को लेकर चर्चा जारी है। इसी बीच केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान ने वाहन चालकों के बीच नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि कार का असली माइलेज कैसे पता लगाया जाए और क्या इसके लिए डीलर की मशीन ही जरूरी है।
गडकरी के बयान के बाद तेज हुई बहस
एक इंटरव्यू के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि कार का माइलेज केवल कंपनी के अधिकृत डीलर की मशीन से ही चेक किया जा सकता है। यह टिप्पणी उस वक्त आई, जब एक पत्रकार ने दावा किया कि E20 पेट्रोल ज्यादा उपलब्ध होने के बाद उनकी कार का माइलेज करीब 11 किलोमीटर प्रति लीटर से घटकर 7 किलोमीटर प्रति लीटर रह गया।
डैशबोर्ड पर दिखने वाला माइलेज एक अनुमान
ज्यादातर आधुनिक कारों के इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर या इंफोटेनमेंट स्क्रीन पर फ्यूल एफिशिएंसी के आंकड़े दिखाई देते हैं। ये आंकड़े गाड़ी की इंजन कंट्रोल यूनिट यानी ECU के डेटा के आधार पर कैलकुलेट किए जाते हैं।
इसमें फ्यूल इंजेक्टर की एक्टिविटी, इंजन लोड, थ्रॉटल पोजीशन, स्पीड और तय की गई दूरी जैसी जानकारी शामिल होती है। हालांकि, डैशबोर्ड पर दिखने वाला माइलेज फ्यूल की असली खपत का सीधा माप नहीं होता।
कई चीजें बदल सकती हैं डैशबोर्ड की रीडिंग
ट्रैफिक, टायर प्रेशर, सड़क की ढलान, आइडलिंग, एयर कंडीशनर का इस्तेमाल और ट्रिप कंप्यूटर को आखिरी बार कब रीसेट किया गया था, इन सभी चीजों का असर माइलेज की रीडिंग पर पड़ सकता है।
इंडिपेंडेंट टेस्ट में डैशबोर्ड पर दिखने वाले माइलेज और असल फ्यूल इकॉनमी के बीच करीब 2 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक का अंतर देखा गया है। इसलिए डैशबोर्ड की रीडिंग से माइलेज के ट्रेंड का अंदाजा तो लगाया जा सकता है, लेकिन यह हमेशा पूरी तरह सटीक नहीं होती।
टैंक-टू-टैंक तरीके से खुद चेक करें माइलेज
रोजाना गाड़ी चलाने वालों के लिए टैंक-टू-टैंक तरीका फ्यूल एफिशिएंसी का पता लगाने का आसान और प्रैक्टिकल तरीका है। इसके लिए सबसे पहले टैंक को ऑटोमैटिक कट-ऑफ तक फुल कराएं और ट्रिप मीटर को रीसेट कर दें।
इसके बाद सामान्य तरीके से गाड़ी चलाएं। अगली बार फ्यूल भरवाते समय टैंक को फिर ऑटोमैटिक कट-ऑफ तक भरें। अब गाड़ी ने जितनी दूरी तय की और जितने लीटर फ्यूल भरा गया, दोनों आंकड़े नोट कर लें।
ऐसे निकलेगा कार का माइलेज
माइलेज निकालने के लिए तय की गई दूरी को इस्तेमाल हुए फ्यूल से भाग देना होता है।
Fuel Efficiency = Distance Travelled ÷ Fuel Consumed
उदाहरण के तौर पर, अगर कार 520 किलोमीटर चली और अगली बार टैंक भरने में 40 लीटर फ्यूल लगा, तो उसका माइलेज 13 किलोमीटर प्रति लीटर होगा। तीन या चार बार इसी तरह हिसाब करने से ज्यादा भरोसेमंद औसत मिल सकता है।
डीलर की मशीन क्या करती है?
अधिकृत सर्विस सेंटर में डायग्नोस्टिक इक्विपमेंट की मदद से इंजन पैरामीटर, इंजेक्टर परफॉर्मेंस और ECU डेटा चेक किया जाता है। इससे उन मैकेनिकल या इलेक्ट्रॉनिक दिक्कतों का पता लगाने में मदद मिलती है, जिनकी वजह से फ्यूल एफिशिएंसी कम हो सकती है।
हालांकि, डायग्नोस्टिक मशीन रोजाना की ड्राइविंग में मिलने वाले असली माइलेज को सीधे नहीं मापती। ऑफिशियल फ्यूल एफिशिएंसी टेस्ट कंट्रोल्ड स्थितियों में स्टैंडर्ड ड्राइव साइकिल और खास इक्विपमेंट की मदद से किए जाते हैं।
असली ऑन-रोड माइलेज कैसे समझें?
गडकरी का बयान गाड़ी की डिटेल्ड डायग्नोस्टिक जांच के संदर्भ में लागू हो सकता है, लेकिन ड्राइवर अपनी कार का ऑन-रोड माइलेज खुद भी चेक कर सकते हैं। डैशबोर्ड की रीडिंग को एक संकेत की तरह देखा जा सकता है, जबकि टैंक-टू-टैंक कैलकुलेशन रोजमर्रा की फ्यूल एफिशिएंसी का ज्यादा प्रैक्टिकल अनुमान देता है।