चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगेगा ब्रेक? सरकार ने एथेनॉल बनाने के लिए बदले नियम, जानिए क्या होगा असर
देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और सप्लाई की चिंता के बीच केंद्र सरकार ने एथेनॉल उत्पादन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। नए सप्लाई सीजन में गन्ने के रस और चीनी के सिरप से एथेनॉल बनाने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे में सवाल है कि अब एथेनॉल कैसे बनेगा, पेट्रोल में इसकी मिलावट पर क्या असर पड़ेगा और क्या चीनी सस्ती होगी?

In Short
- चीनी की सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार ने गन्ने के रस और सिरप से एथेनॉल बनाने पर रोक लगाने का फैसला किया।
- तेल कंपनियों ने 2026-27 के लिए करीब 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदने के टेंडर जारी किए हैं।
- अब एथेनॉल उत्पादन में मक्का और चावल जैसे अनाज का इस्तेमाल बढ़ेगा, जबकि E20 कार्यक्रम जारी रहेगा।
देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और इसकी सप्लाई को लेकर चिंता के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 2026-27 के एथेनॉल सप्लाई सीजन के लिए चीनी बनाने में इस्तेमाल होने वाले गन्ने के रस और सिरप से एथेनॉल उत्पादन पर रोक लगाने का फैसला किया है। इसका मकसद बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों को काबू में रखना है।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में कम बारिश और खराब मौसम के कारण गन्ने की पैदावार प्रभावित हुई है। इससे देश में चीनी की सप्लाई घटने की आशंका बढ़ गई है।
पिछले सीजन में देश का कुल चीनी उत्पादन घरेलू जरूरतों को मुश्किल से पूरा कर पाया था। भारत में हर साल करीब 280 से 285 लाख टन चीनी की खपत होती है। ऐसे में सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा गन्ने का इस्तेमाल चीनी बनाने में हो, ताकि बाजार में इसकी कमी न हो और कीमतें नियंत्रित रहें।
अब एथेनॉल कैसे बनाया जाएगा?
नए फैसले के तहत नवंबर से शुरू होने वाले 2026-27 के एथेनॉल सप्लाई सीजन में गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हैवी मोलासेस (शीरे) का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि एथेनॉल का उत्पादन बंद हो जाएगा। सरकारी तेल कंपनियों ने अगले सप्लाई सीजन के लिए करीब 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदने के टेंडर जारी किए हैं।
अब एथेनॉल बनाने के लिए मुख्य रूप से मक्का, टूटे चावल, अतिरिक्त अनाज और सी-हैवी मोलासेस जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा।
क्या पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने पर पड़ेगा असर?
भारत ने पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर लिया है। इसे E20 के नाम से जाना जाता है।
सरकार का कहना है कि चीनी आधारित एथेनॉल पर रोक के बावजूद बायोफ्यूल कार्यक्रम जारी रहेगा। इसके लिए अनाज से बनने वाले एथेनॉल पर निर्भरता बढ़ाई जाएगी।
देश में एथेनॉल उत्पादन की कुल क्षमता करीब 2,000 करोड़ लीटर तक पहुंच चुकी है। सरकार भविष्य में पेट्रोल में 25 फीसदी और 27 फीसदी एथेनॉल मिलाने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रही है।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
इस फैसले का सबसे बड़ा मकसद आम लोगों को चीनी की बढ़ती कीमतों से राहत देना है। गन्ने का ज्यादा इस्तेमाल चीनी उत्पादन में होने से बाजार में सप्लाई बेहतर हो सकती है।
हालांकि, चीनी की कीमतें कितनी कम होंगी, यह उत्पादन, मांग और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा। वहीं, एथेनॉल उत्पादन में अनाज का इस्तेमाल बढ़ने से इस क्षेत्र में अनाज की मांग भी बढ़ सकती है।