अगर E20 नहीं होता तो पेट्रोल की कीमत देश में इतने रुपये लीटर होती! नितिन गडकरी ने संसद में दिया बड़ा बयान

केंद्र सरकार ने E20 एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का जोरदार बचाव करते हुए कहा है कि देशभर में 23 करोड़ से अधिक वाहन पिछले ढाई साल से E15+ और E20 पेट्रोल पर चल रहे हैं, लेकिन इंजन खराब होने या बड़े पैमाने पर तकनीकी दिक्कत आने का कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है। सरकार ने यह भी दावा किया कि अगर एथेनॉल ब्लेंडिंग नहीं होती तो...

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By Gaurav Kumar:

केंद्र सरकार ने E20 एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का जोरदार बचाव करते हुए कहा है कि देशभर में 23 करोड़ से अधिक वाहन पिछले ढाई साल से E15+ और E20 पेट्रोल पर चल रहे हैं, लेकिन इंजन खराब होने या बड़े पैमाने पर तकनीकी दिक्कत आने का कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है। सरकार ने यह भी दावा किया कि अगर एथेनॉल ब्लेंडिंग नहीं होती तो पश्चिम एशिया संकट के दौरान पेट्रोल की कीमत करीब ₹125 प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी।

लोकसभा में सरकार ने रखा पक्ष

लोकसभा में लिखित जवाब में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि 20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें E15+ और E20 ईंधन का इस्तेमाल कर रही हैं। इस दौरान एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से इंजन फेल होने या वाहन खराब होने का कोई सत्यापित प्रमाण नहीं मिला है।

सरकार ने कहा कि वाहन निर्माताओं के सर्विस रिकॉर्ड भी इस दावे का समर्थन करते हैं। एक प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें करीब 1.5 करोड़ पुराने वाहन भी शामिल थे। जांच में E20 की वजह से इंजन को नुकसान, असामान्य जंग या पुर्जों की उम्र कम होने जैसी कोई समस्या नहीं मिली। एक प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता ने भी E20 इस्तेमाल करने वाले वाहनों में नुकसान की अधिक घटनाएं नहीं होने की जानकारी दी है।

एथेनॉल ब्लेंडिंग से पेट्रोल की कीमत नियंत्रित रही

सरकार के मुताबिक, पश्चिम एशिया संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। इसके बावजूद घरेलू स्तर पर पेट्रोल की कीमत सीमित बढ़ी क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां करीब ₹70 प्रति लीटर की दर से एथेनॉल खरीद सकीं और उसे पेट्रोल में मिलाया गया।

सरकार ने कहा कि संकट के चरम पर बाजार आधारित कीमत के हिसाब से पेट्रोल करीब ₹125 प्रति लीटर तक पहुंच सकता था, लेकिन दिल्ली में उपभोक्ताओं को यह ₹94.77 प्रति लीटर (एक्स-डिपो) के आसपास मिला। हालांकि, फरवरी-मार्च 2026 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹21,300 करोड़ की अंडर-रिकवरी भी झेलनी पड़ी।

माइलेज पर असर, लेकिन कई बड़े फायदे भी

सरकार ने माना कि जिन वाहनों को मूल रूप से E10 पेट्रोल के लिए डिजाइन किया गया था, उनमें E20 के इस्तेमाल से ईंधन दक्षता 2% से 6% तक घट सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति और वाहन के रखरखाव पर भी निर्भर करेगा।

सरकार का कहना है कि E20 कार्यक्रम से अब तक करीब ₹1.98 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इसके अलावा लगभग 317 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात कम हुआ, 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटा और किसानों को ₹1.66 लाख करोड़ से अधिक की अतिरिक्त आय मिली है।

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