31 मार्च के बाद भी जारी रह सकती EV सब्सिडी! इलेक्ट्रिक 2W और 3W सेगमेंट को मिलेगा बड़ा फायदा - डिटेल्स

केंद्र सरकार 31 मार्च 2026 के बाद भी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर पर मिलने वाली सब्सिडी को जारी रखने पर विचार कर रही है, ताकि इन सेगमेंट में मांग बनी रहे और ईवी अपनाने की रफ्तार तेज हो सके।

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In Short

  • सरकार 31 मार्च 2026 के बाद भी e-2W और e-3W सब्सिडी बढ़ाने पर विचार कर रही है
  • बजट का बड़ा हिस्सा अभी बचा है, इसलिए स्कीम जारी रखने की संभावना बढ़ी
  • सब्सिडी जारी रही तो EV डिमांड और इंडस्ट्री ग्रोथ को मिलेगा सपोर्ट

By Gaurav Kumar:

केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (e-2W) और थ्री-व्हीलर (e-3W) पर मिलने वाली सब्सिडी को 31 मार्च 2026 के बाद भी जारी रखने पर विचार कर रही है। सूत्रों ने बताया कि इस प्रस्ताव की समीक्षा इसी हफ्ते प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में हुई। इसके बाद भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) ने इसे वित्त मंत्रालय के साथ आगे बढ़ाया है।

PMO में हुई समीक्षा, आगे बढ़ा प्रस्ताव

बीते सोमवार को हुई बैठक में फंड के उपयोग और इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री के रुझानों पर चर्चा हुई। इस दौरान यह देखा गया कि किन सेगमेंट में स्कीम का असर ज्यादा है और कहां सुधार की जरूरत है। एक अधिकारी के मुताबिक 'फोकस यह है कि मौजूदा बजट का पूरा इस्तेमाल हो, बिना अतिरिक्त फंड मांगे।'

बजट बचा, इसलिए बढ़ सकती है स्कीम

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ई-टू व्हीलर के लिए तय 1,772 करोड़ रुपये में से अब तक करीब 1,259.9 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं। यानी अभी भी बड़ा हिस्सा बचा है। इसी तरह ई-थ्री व्हीलर कैटेगरी में 907 करोड़ रुपये के बजट में से 737.35 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।इसी बची हुई राशि को देखते हुए सरकार स्कीम को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है, ताकि आवंटित फंड का बेहतर उपयोग हो सके।

किन सेगमेंट को मिलेगा फायदा?

सूत्रों के मुताबिक, अगर विस्तार को मंजूरी मिलती है तो यह मुख्य रूप से उन सेगमेंट तक सीमित रहेगा जहां मांग बनाए रखने के लिए सब्सिडी जरूरी है। इनमें ई-टू व्हीलर, ई-रिक्शा और ई-कार्ट शामिल हैं। ये सेगमेंट भारत के कुल ईवी बाजार का बड़ा हिस्सा हैं और कीमत के प्रति काफी संवेदनशील भी हैं।

सितंबर 2024 में शुरू हुई PM E-DRIVE योजना का कुल बजट 10,900 करोड़ रुपये है। इस स्कीम के तहत अब तक करीब 10 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बिक चुके हैं, जबकि लक्ष्य 14 लाख का था। यानी अभी भी लक्ष्य से दूरी बनी हुई है।

इंडस्ट्री से जुड़े खिलाड़ियों का कहना है कि अगर सब्सिडी समय से पहले खत्म हुई तो मांग पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से वे स्कीम जारी रखने की मांग कर रहे हैं।

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