कच्चा तेल 115 डॉलर के पार, फिर भी नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम; सरकार का बड़ा फैसला

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद सरकार फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। सरकार का फोकस ऊर्जा सुरक्षा, ईंधन की लगातार सप्लाई और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने पर है। इस बीच महंगे क्रूड से तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है।

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कच्चा तेल महंगा, फिर भी नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम
कच्चा तेल महंगा, फिर भी नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

In Short

  • भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 115.27 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची।
  • सरकार फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने की योजना में नहीं है।
  • महंगे कच्चे तेल से OMCs पर पेट्रोल-डीजल में नुकसान का दबाव बढ़ा।

By Shakshi:

कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी के बावजूद सरकार ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने का फैसला नहीं लिया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अभी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार का पूरा ध्यान देश की ऊर्जा सुरक्षा, ईंधन की लगातार सप्लाई और घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखने पर है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर देश के आयात बिल और तेल कंपनियों की लागत पर पड़ता है।

भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल के पार

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 22 सितंबर को बढ़कर 115.27 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। वहीं, सितंबर महीने में अब तक कच्चे तेल की औसत कीमत करीब 114.83 डॉलर प्रति बैरल रही है।

सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों और दुनिया के कई हिस्सों में जारी तनाव के कारण तेल बाजार पर दबाव बना हुआ है।

इस बीच, सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और ईंधन की सप्लाई को बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों से तेल की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत जारी है।

तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव, आयात के नए विकल्पों पर नजर

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर सरकारी तेल कंपनियों पर पड़ रहा है। अनुमान के मुताबिक, पेट्रोल पर तेल कंपनियों को करीब 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 23 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

हालांकि, सरकार अभी कीमतें बढ़ाकर आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालना चाहती। अगर लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहते हैं, तो भविष्य में तेल कंपनियों को आर्थिक मदद देने पर विचार किया जा सकता है।

सरकार रूस से कच्चे तेल की सप्लाई बनाए रखने के साथ-साथ आयात के स्रोतों को भी बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। इराक और सऊदी अरब जैसे देशों से तेल खरीद बढ़ाने के विकल्पों पर भी नजर रखी जा रही है। फिलहाल सरकार के सामने ईंधन की कीमतें स्थिर रखने, तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति संभालने और देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने की चुनौती है।

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