E20 पेट्रोल भरवाने वालों के लिए बड़ी खबर! सरकार ने इंजन डैमेज के दावों पर कही ये बात
E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर इंजन खराब होने और माइलेज घटने जैसी कई बातें कही जाती रही हैं। लेकिन क्या सच में इससे गाड़ियों को नुकसान हो रहा है? सरकार ने राज्यसभा में इस पर साफ जवाब दिया है और बताया है कि अब तक E20 फ्यूल को लेकर क्या स्थिति सामने आई है।

In Short
- सरकार के मुताबिक, E20 फ्यूल से इंजन या फ्यूल पंप खराब होने की कोई बड़ी शिकायत नहीं मिली है।
- जांच में E20 फ्यूल को सुरक्षित पाया गया, हालांकि माइलेज में 2 से 6 फीसदी तक कमी आ सकती है।
- सरकार के मुताबिक, E20 फ्यूल से E10 के मुकाबले करीब 30 फीसदी कम कार्बन उत्सर्जन होता है।
Ethanol Blended Petrol: E20 फ्यूल को लेकर गाड़ी मालिकों के बीच इंजन, माइलेज और परफॉर्मेंस से जुड़े कई सवाल उठते रहे हैं। अब सरकार ने राज्यसभा में साफ किया है कि E20 फ्यूल के कारण गाड़ियों में बड़े स्तर पर किसी तरह की गंभीर परेशानी की पुष्टि नहीं हुई है।
सरकार के मुताबिक, इंजन फेल होने, जंग लगने, फ्यूल पंप खराब होने, फ्यूल में पानी आने या गाड़ी की परफॉर्मेंस बिगड़ने से जुड़ी कोई व्यापक और पुख्ता शिकायत अब तक नहीं मिली है।
लैब टेस्ट और फील्ड ट्रायल में की गई जांच
सरकार ने बताया कि E20 फ्यूल की सुरक्षा को लेकर कई संस्थानों और वाहन कंपनियों ने विस्तार से अध्ययन किया है। इनमें ARAI, SIAM, IOCL, IIP और ऑटोमोबाइल कंपनियां शामिल हैं।
इन संस्थानों ने E20 फ्यूल की जांच लैब टेस्ट और फील्ड ट्रायल के जरिए की। सरकार के अनुसार, इन अध्ययनों के बाद यह सामने आया कि तय मानकों के तहत E20 फ्यूल का इस्तेमाल गाड़ियों के लिए सुरक्षित है।
पुरानी गाड़ियों में भी नहीं दिखा असामान्य नुकसान
अध्ययन के दौरान पुरानी गाड़ियों यानी ऐसे वाहनों की भी जांच की गई, जिन्हें पहले के फ्यूल मानकों के हिसाब से बनाया गया था। जांच में इन गाड़ियों में किसी तरह की असामान्य टूट-फूट नहीं देखी गई।
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सरकार के मुताबिक, पुरानी गाड़ियों की परफॉर्मेंस में भी कोई बड़ा बदलाव सामने नहीं आया। यानी E20 फ्यूल के इस्तेमाल से इंजन या अन्य जरूरी हिस्सों पर असामान्य असर पड़ने की पुष्टि नहीं हुई है।
माइलेज में 2 से 6 फीसदी की कमी संभव
हालांकि, अध्ययनों में यह पाया गया कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से गाड़ी की फ्यूल एफिशिएंसी यानी माइलेज में करीब 2 से 6 फीसदी तक की कमी आ सकती है।
सरकार ने यह भी कहा कि किसी गाड़ी का माइलेज केवल फ्यूल के प्रकार पर निर्भर नहीं करता। ड्राइविंग का तरीका, गाड़ी की सर्विस और देखभाल, टायर का प्रेशर, व्हील अलाइनमेंट और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल भी माइलेज पर असर डालते हैं।
E10 के मुकाबले कम कार्बन उत्सर्जन
सरकार के अनुसार, E20 फ्यूल से गाड़ी की रफ्तार पकड़ने की क्षमता बेहतर हो सकती है। इससे राइड क्वालिटी में भी सुधार देखने को मिल सकता है।
E10 फ्यूल की तुलना में E20 फ्यूल से करीब 30 फीसदी कम कार्बन उत्सर्जन होने का दावा किया गया है। इसके अलावा, यह फ्यूल अधिक साफ तरीके से जलता है और इससे निकलने वाला पार्टिकुलेट मैटर लगभग शून्य के करीब रह सकता है।