E20 पेट्रोल से 2023 से पहले की गाड़ियों की माइलेज 3-5% तक घट सकती है, सरकार ने संसद में स्वीकारा
संसद का मॉनसून सत्र शुरू होते ही राज्यसभा में E20 पेट्रोल का मुद्दा उठा। सरकार ने माना कि कुछ पुरानी गाड़ियों का माइलेज 3–5% तक घट सकता है, लेकिन नुकसान के दावों को खारिज किया। आखिर वाहन कंपनियों के सर्विस डेटा में क्या सामने आया और सरकार ने क्या कहा? पढ़ें पूरी खबर।

In Short
- सरकार ने माना कि साल 2023 से पहले की कुछ E10 गाड़ियों का माइलेज E20 पेट्रोल से 3–5% तक कम हो सकता है।
- सरकार के मुताबिक, वाहन कंपनियों के सर्विस डेटा में E20 फ्यूल से गाड़ियों को नुकसान होने के ज्यादा मामले नहीं मिले।
- सरकार ने साफ किया कि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20% से ज्यादा बढ़ाने पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।
E20 Petrol: संसद का मॉनसून सत्र आज शुरू हो गया और पहले ही दिन E20 पेट्रोल का मुद्दा राज्यसभा में उठा। पुरानी गाड़ियों के माइलेज और इंजन को नुकसान की चिंता पर सरकार ने आंकड़ों के साथ जवाब दिया है।
पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने यानी E20 फ्यूल को लेकर वाहन मालिकों की चिंता के बीच सरकार ने माना है कि कुछ पुरानी गाड़ियों के माइलेज में मामूली कमी आ सकती है। हालांकि, सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों में नुकसान होने या पार्ट्स जल्दी खराब होने की बात सामने नहीं आई है।
पुरानी गाड़ियों में 3-5% तक घट सकता है माइलेज
राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि साल 2023 से पहले की कुछ E10 के हिसाब से बनी गाड़ियों के माइलेज में करीब 3-5% तक की कमी आ सकती है।
उन्होंने कहा कि यह कमी आमतौर पर मामूली होती है। गाड़ी का माइलेज सिर्फ फ्यूल पर निर्भर नहीं करता, बल्कि उसे चलाने के तरीके और उसकी देखभाल का भी बड़ा असर पड़ता है।
इन वजहों से भी कम होता है गाड़ी का माइलेज
सरकार के मुताबिक, ड्राइविंग का तरीका, गाड़ी की समय पर सर्विस, टायर का प्रेशर, व्हील अलाइनमेंट और एसी का इस्तेमाल भी माइलेज को प्रभावित करते हैं।
सरकार, वाहन बनाने वाली कंपनियों और गाड़ियों की जांच करने वाली एजेंसियों ने साफ किया है कि फ्यूल की किस्म के अलावा इन सभी बातों का माइलेज पर ज्यादा असर पड़ सकता है।
E20 से गाड़ी खराब होने का सबूत नहीं
मंत्रालय ने कहा कि E20 फ्यूल इंजन को ज्यादा साफ और बेहतर तरीके से चलाने में मदद करता है। इससे गाड़ियों से निकलने वाले धुएं को कम करने में भी मदद मिलती है। यह फ्यूल सिस्टम और गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले सामान के साथ काम करने के लायक है।
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सरकार के मुताबिक, E20 से गाड़ियों में सामान्य से ज्यादा टूट-फूट या फ्यूल से जुड़े पार्ट्स में परेशानी होने की जानकारी नहीं मिली है।
गाड़ियों की सर्विस में नहीं मिला नुकसान
सुरेश गोपी ने वाहन कंपनियों के सर्विस डेटा का हवाला देते हुए बताया कि एक बड़ी चारपहिया वाहन कंपनी ने वित्त वर्ष 2025–26 में 2.84 करोड़ गाड़ियों की सर्विस की। इनमें 1.5 करोड़ पुरानी गाड़ियां ऐसी थीं, जिन्हें E20 के लिए सर्टिफाइड नहीं किया गया था।
इसके बावजूद कंपनी ने E20 पेट्रोल के कारण किसी गाड़ी को नुकसान होने की जानकारी नहीं दी।
दोपहिया कंपनी के डेटा में भी नहीं बढ़ा नुकसान
एक बड़ी दोपहिया वाहन कंपनी ने भी अपने सर्विस डेटा की जांच में पाया कि E20 पर चलने वाली गाड़ियों में पुराने फ्यूल के मुकाबले ज्यादा नुकसान के मामले सामने नहीं आए।
सरकार ने कहा कि तय मानकों वाला फ्यूल इस्तेमाल करने वाली गाड़ियों पर कंपनियां अपनी वारंटी से जुड़ी जिम्मेदारी भी निभा रही हैं।
20% से ज्यादा एथेनॉल पर अभी फैसला नहीं
सरकार ने साफ किया है कि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20% से आगे बढ़ाने पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। कमर्शियल इस्तेमाल के लिए डीजल में एथेनॉल मिलाने की भी फिलहाल कोई योजना तय नहीं हुई है।
हालांकि, सरकार ने हाल ही में सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में बदलाव के लिए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें पेट्रोल में ज्यादा मात्रा वाले एथेनॉल मिश्रण को नियमों में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है।