पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत में EV की मांग तेज! पेट्रोल-डीजल महंगे होने के डर से बदला बाजार का रुख

बिजनेस टुडे के पत्रकार करण धार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ऑटो सेक्टर की दिग्गज संस्था सियाम (SIAM) के अध्यक्ष और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शैलेश चंद्रा के मुताबिक, लोग अब पेट्रोल-डीजल के विकल्प के तौर पर बिजली से चलने वाली गाड़ियों को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं।

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By Gaurav Kumar:

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की आहट और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के डर ने भारत में कारों के बाजार का रुख बदल दिया है। मार्च के महीने में भारतीय यात्री वाहन उद्योग में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग में जबरदस्त उछाल देखा गया है।

बिजनेस टुडे के पत्रकार करण धार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ऑटो सेक्टर की दिग्गज संस्था सियाम (SIAM) के अध्यक्ष और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शैलेश चंद्रा के मुताबिक, लोग अब पेट्रोल-डीजल के विकल्प के तौर पर बिजली से चलने वाली गाड़ियों को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं।

टाटा मोटर्स ने दर्ज की भारी बढ़त

शैलेश चंद्रा ने संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि मार्च के दौरान उनके ब्रांड के इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में 20 से 25 प्रतिशत तक की तेजी आई है। चंद्रा का मानना है कि इस उछाल के पीछे पश्चिम एशिया का तनाव एक बड़ा कारण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मार्च महीने में यात्री वाहनों की बिक्री में यह बदलाव बहुत साफ तौर पर दिखाई दिया है।

तेल की कीमतों का डर और ईवी का क्रेज

भले ही अभी भारत में ईंधन की कीमतों में वैसी बढ़ोतरी नहीं देखी गई है, लेकिन भविष्य को लेकर ग्राहकों में चिंता बनी हुई है। शैलेश चंद्रा ने कहा कि युद्ध के कारण आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल महंगे होने की आशंका है। उन्होंने यूरोप का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर पहले ही दिखने लगा है। चंद्रा के अनुसार, अगर तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो ईवी की मांग में और भी इजाफा होगा। फिलहाल युद्ध इस पूरी मांग को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

वित्त वर्ष 2025-26 में बना नया रिकॉर्ड

भारतीय ऑटो बाजार के लिए बीता वित्त वर्ष (2025-26) ऐतिहासिक रहा है। इस दौरान यात्री वाहनों की बिक्री 46.4 लाख यूनिट के साथ अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जो पिछले साल के मुकाबले 7.9 प्रतिशत ज्यादा है। मार्च 2026 की बात करें तो कारों की बिक्री सालाना आधार पर 16 प्रतिशत बढ़कर 4.42 लाख यूनिट रही। सियाम ने अपने बयान में कहा कि जीएसटी दरों में कटौती, इनकम टैक्स में राहत और आरबीआई द्वारा रेपो रेट कम किए जाने से लोगों की खरीदारी करने की क्षमता बढ़ी है।

चुनौतियों के बीच भी ईवी की रफ्तार

वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में बाजार ने 16.7 प्रतिशत की जोरदार बढ़त दर्ज की, जबकि पहली छमाही में मामूली गिरावट देखी गई थी। इस पूरे साल में इलेक्ट्रिक कारों के रजिस्ट्रेशन में 83 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया है। हालांकि, सियाम ने यह भी आगाह किया है कि पश्चिम एशिया के संकट से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, माल ढुलाई के रास्तों में रुकावट और बढ़ते विनिमय दर जैसे मुद्दे ऑटो सेक्टर के लिए भविष्य में चिंता का विषय बने रह सकते हैं।

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