E20 पेट्रोल पर बढ़ती बहस के बीच E10 की वापसी की चर्चा, क्या पुराने वाहनों को फिर मिलेगा यह ऑप्शन?
E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने पुराने वाहनों के लिए E10 का विकल्प वापस लाने की सलाह दी है। उन्होंने E20 से आगे E27 या E30 की तरफ बढ़ने से पहले फूड वर्सेस फ्यूल ट्रेड ऑफ का पूरा आकलन करने की जरूरत भी बताई है।

In Short
- पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल का विकल्प दोबारा उपलब्ध कराने की सलाह
- E20 में एनर्जी की कमी करीब 6 से 7 फीसदी, 30 फीसदी माइलेज गिरने के दावे सही नहीं
- देश में करीब 7.5 से 8 करोड़ पुराने BS4 से पहले के दोपहिया वाहन चिंता का बड़ा कारण
E20 Petrol: देश में E20 पेट्रोल को लेकर बहस तेज है। माइलेज कम होने और गाड़ियों के पार्ट्स खराब होने जैसे दावों के बीच भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल का विकल्प दोबारा उपलब्ध कराने की बात कही है। साथ ही उन्होंने E20 से आगे E27 या E30 की तरफ बढ़ने से पहले खाने और फ्यूल के बीच होने वाले असर का पूरा हिसाब लगाने की जरूरत बताई है।
E20 से आगे बढ़ने से पहले क्यों जरूरी है सोच
नागेश्वरन ने कहा कि ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग की तरफ बढ़ने से पहले फूड वर्सेस फ्यूल ट्रेड ऑफ को समझना जरूरी है। यानी यह देखना होगा कि इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली फसल का जमीन और पानी पर कितना असर पड़ता है और इससे खाने की जरूरतों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
क्या E20 से माइलेज कम होता है
इथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले कम एनर्जी होती है। एक लीटर इथेनॉल से पेट्रोल के मुकाबले करीब दो तिहाई ऊर्जा मिलती है। E20 में 20 फीसदी इथेनॉल होने के कारण कुल एनर्जी में करीब 6 से 7 फीसदी की कमी हो सकती है। इसलिए एक लीटर फ्यूल में गाड़ी कुछ कम दूरी तय कर सकती है। हालांकि 30 फीसदी तक माइलेज गिरने के दावों को सही नहीं बताया गया है।
E20 से कार्बन मोनोऑक्साइड और बिना जले हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषक भी कम हो सकते हैं। अमेरिका में 86 वाहनों को E20 फ्यूल के साथ करीब 1 करोड़ किलोमीटर तक चलाकर टेस्ट किया गया। इसमें वाहनों के पार्ट्स में अतिरिक्त घिसावट नहीं मिली। भारत में ARAI पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट और इंडियन ऑयल के टेस्ट में भी मोटे तौर पर ऐसे ही नतीजे सामने आए हैं।
पुराने दोपहिया वाहनों में कहां है परेशानी
भारत में करीब 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहन BS4 से पहले के हैं और इनमें कार्ब्युरेटर का इस्तेमाल होता है। ऐसे कार्ब्युरेटर इथेनॉल ब्लेंड में मौजूद अतिरिक्त ऑक्सीजन के हिसाब से फ्यूल की मात्रा खुद एडजस्ट नहीं कर पाते। इससे इंजन को जरूरत से कम फ्यूल मिल सकता है और वह गर्म हो सकता है।
पुराने वाहनों में लगे कुछ रबर सील भी लंबे समय तक इथेनॉल के संपर्क में रहने पर खराब हो सकते हैं।
पुराने वाहनों के लिए E10 का विकल्प
नागेश्वरन की सलाह है कि पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए। इसमें 90 फीसदी पेट्रोल और 10 फीसदी इथेनॉल होता है। इससे पुराने वाहन मालिकों को विकल्प मिलेगा जबकि नए वाहनों में E20 का इस्तेमाल जारी रखा जा सकता है। इसके लिए कुल इथेनॉल की खपत बढ़ाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।