महंगी कार, शानदार फीचर्स लेकिन चाइल्ड सीट पर कंजूसी! अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेपरवाह क्यों?
कार में सफर के दौरान क्या आपका बच्चा सच में सुरक्षित है? कई माता-पिता बच्चों को गोद में बैठाकर या बड़ों वाली सीट बेल्ट लगाकर सफर करते हैं। लेकिन हादसे के दौरान ये आदत खतरनाक हो सकती है। भारत में चाइल्ड कार सीट को लेकर जागरूकता भी बेहद कम है। जानिए ISOFIX सीट कैसे काम करती है और बच्चों के लिए क्यों जरूरी है।

In Short
- भारत में चाइल्ड कार सीट का इस्तेमाल बेहद कम, कई माता-पिता को इसकी जानकारी तक नहीं है।
- सही चाइल्ड सीट हादसे में गंभीर चोट का खतरा कम कर सकती है, ISOFIX से सीट फिट करना आसान होता है।
- बच्चे को गोद में बैठाना या बड़ों की सीट बेल्ट लगाना हादसे के दौरान खतरनाक साबित हो सकता है।
भारत में कार खरीदते समय लोग एयरबैग, सनरूफ और सेफ्टी रेटिंग पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी चाइल्ड कार सीट को अक्सर भूल जाते हैं। कई माता-पिता बच्चे को गोद में बैठाकर सफर करते हैं। उन्हें लगता है कि उनकी गोद सबसे सुरक्षित जगह है। लेकिन सड़क हादसे के दौरान यही आदत बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में हर माता-पिता को ISOFIX चाइल्ड सीट की अहमियत समझनी चाहिए।
भारत में कितने माता-पिता इस्तेमाल करते हैं चाइल्ड सीट?
सेव लाइफ फाउंडेशन और निसान की जनवरी 2019 की स्टडी में सामने आया था कि 75.7 फीसदी लोगों को चाइल्ड रेस्ट्रेंट सिस्टम की जानकारी ही नहीं थी। सर्वे में अलग-अलग तरह की चाइल्ड सीट का इस्तेमाल बेहद कम पाया गया। सिर्फ 4.1 फीसदी ने रियर-फेसिंग सीट, 2.1 फीसदी ने फॉरवर्ड-फेसिंग सीट और 4.3 फीसदी ने बूस्टर सीट इस्तेमाल करने की बात कही।
कर्नाटक में अक्टूबर 2022 से मई 2025 के बीच की गई एक स्टडी में भी चाइल्ड रेस्ट्रेंट का इस्तेमाल एक फीसदी से कम पाया गया। हालांकि, ये अलग-अलग इलाकों के आंकड़े हैं, पूरे भारत का मौजूदा औसत नहीं।
हादसे में कितनी कम हो सकती है चोट?
अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक, सही चाइल्ड कार सीट का इस्तेमाल करने से हादसे में बच्चों को चोट लगने का खतरा सिर्फ सीट बेल्ट इस्तेमाल करने के मुकाबले 71 से 82 फीसदी तक कम हो सकता है।
वहीं, अमेरिकी सड़क सुरक्षा एजेंसी NHTSA के मुताबिक, सही तरीके से इस्तेमाल की गई चाइल्ड सीट कार हादसे में एक साल से छोटे बच्चों की मौत का खतरा करीब 71 फीसदी और एक से चार साल के बच्चों में 54 फीसदी तक कम कर सकती है।
हालांकि, ये आंकड़े सभी सही चाइल्ड सीट से जुड़े हैं, सिर्फ ISOFIX सीट से नहीं।
ISOFIX सीट क्या है और क्यों जरूरी है?
ISOFIX एक खास सिस्टम है, जिससे बच्चों की कार सीट को गाड़ी में लगे मेटल एंकर पॉइंट्स से सीधे जोड़ा जाता है। इससे सीट मजबूती से फिट होती है और गलत तरीके से लगाने की आशंका कम होती है।
अचानक ब्रेक लगने या टक्कर होने पर सही तरीके से फिट की गई चाइल्ड सीट बच्चे को अपनी जगह सुरक्षित रखने में मदद करती है। इससे सिर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर गंभीर चोट का खतरा कम किया जा सकता है।
हालांकि, ISOFIX गलत इंस्टॉलेशन की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं करता। सीट को सही तरीके से लगाना और बच्चे को हार्नेस से बांधना जरूरी है।
मां-बाप की गोद क्यों नहीं है सबसे सुरक्षित?
कई माता-पिता सोचते हैं कि बच्चे को सीने से लगाकर बैठने से वह सुरक्षित रहेगा। लेकिन तेज टक्कर के दौरान झटके का दबाव इतना ज्यादा हो सकता है कि बच्चे को हाथों से पकड़े रखना मुश्किल हो जाए।
ऐसी स्थिति में बच्चा आगे की सीट या कार के अंदर किसी हिस्से से टकरा सकता है। गोद में बैठे बच्चे पर बड़े व्यक्ति के शरीर का दबाव भी पड़ सकता है।
वहीं, बड़ों के लिए बनी सीट बेल्ट छोटे बच्चों के शरीर के हिसाब से नहीं होती। गलत फिटिंग के कारण हादसे में बच्चे की गर्दन, पेट, छाती और अंदरूनी अंगों को गंभीर चोट पहुंच सकती है।
बच्चों के लिए कौन-सी सीट सही है?
छोटे बच्चों के लिए रियर-फेसिंग इन्फेंट सीट होती है, जो सिर और गर्दन को बेहतर सहारा देती है। बड़े होते बच्चों के लिए हार्नेस वाली टॉडलर सीट और उसके बाद बूस्टर सीट इस्तेमाल की जाती है।
सीट का चुनाव बच्चे की उम्र के साथ उसके वजन और लंबाई के हिसाब से करना चाहिए। छोटे बच्चों को सीट की तय सीमा तक पीछे की ओर मुंह करके बैठाना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
भारत में क्या है नियम?
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 194बी के मुताबिक, 14 साल से कम उम्र के बच्चे को सीट बेल्ट या चाइल्ड रेस्ट्रेंट सिस्टम से सुरक्षित नहीं रखने पर 1,000 रुपये की पेनल्टी का प्रावधान है। कुछ कारों और आयु वर्ग के लिए उचित चाइल्ड रेस्ट्रेंट सिस्टम से जुड़े अलग नियम भी लागू हैं।
माता-पिता के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि कार कितनी भी महंगी क्यों न हो, बच्चे की सुरक्षा के लिए उसकी उम्र और साइज के मुताबिक सही चाइल्ड सीट जरूरी है।