BT Infra Summit 2026: मेट्रो और बस के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के बिना नहीं सुलझेगी शहरों की ट्रांसपोर्ट समस्या
देश के बड़े शहरों में मेट्रो, बस और सड़क नेटवर्क बढ़ रहा है, लेकिन सफर अब भी आसान नहीं हुआ है। Business Today Infrastructure Summit 2026 में Vinayak Chatterjee ने बताया कि अलग-अलग ट्रांसपोर्ट सेवाओं को एक साथ जोड़ने वाली UMTA व्यवस्था क्यों जरूरी है।

भारत के बड़े शहरों में मेट्रो लाइन, नई सड़कें, पुल और इलेक्ट्रिक बसों जैसी सुविधाएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसके बावजूद रोज सफर करने वाले लोगों की परेशानी कम नहीं हो रही। इसकी बड़ी वजह अलग-अलग ट्रांसपोर्ट सेवाओं के बीच सही तालमेल न होना है। यात्रियों को मेट्रो, बस और दूसरे साधनों के बीच बदलते समय मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
Business Today Infrastructure Summit 2026 में Infravision Foundation के Founder Vinayak Chatterjee ने कहा कि शहरों की इस समस्या को दूर करने के लिए यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी यानी UMTA की जरूरत है।
एक ही अथॉरिटी के पास हो पूरी जिम्मेदारी
UMTA एक ऐसी अथॉरिटी है, जो किसी शहर में चलने वाली सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवाओं की देखरेख करती है। इसमें मेट्रो, बस और दूसरे शहरी ट्रांसपोर्ट साधनों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की जिम्मेदारी भी शामिल होती है।
Vinayak Chatterjee ने बताया कि करीब 20 साल पहले सिफारिश की गई थी कि 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले हर शहर में UMTA बनाई जानी चाहिए। देश में ऐसे 53 शहर हैं, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस काम नहीं हुआ।
मेट्रो पॉलिसी में भी रखी गई थी शर्त
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 की मेट्रो रेल पॉलिसी में भी केंद्र की मदद को UMTA लागू करने से जोड़ा गया था। इसके बावजूद देश में लगातार नए मेट्रो प्रोजेक्ट बन रहे हैं, लेकिन UMTA को लागू करने का मुद्दा या तो भुला दिया गया या केवल कागजों तक सीमित रह गया।
Chatterjee के मुताबिक, इसके लिए केवल सरकार जिम्मेदार नहीं है। रोजाना सफर में परेशानी झेलने वाले लोगों ने भी इस मुद्दे पर इतनी मजबूती से आवाज नहीं उठाई कि सरकारों को कदम उठाना पड़े।
लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर बढ़ रही चर्चा
उन्होंने कहा कि अब लास्ट माइल कनेक्टिविटी की समस्या दूर करने के लिए कई सुझाव सामने आ रहे हैं। इनमें फीडर बसें चलाना और मेट्रो रेल कंपनियों को आसपास के इलाकों में बस सेवाएं चलाने की अनुमति देना शामिल है।
उनके मुताबिक, इन सुझावों को लेकर धीरे-धीरे आगे बढ़ने की सोच बन रही है। दिल्ली और मेरठ को जोड़ने वाले रैपिड रेल प्रोजेक्ट से भी भीड़ कम करने में मदद मिल सकती है। इससे मेरठ से मध्य दिल्ली पहुंचना दिल्ली के बाहरी इलाकों से आने के मुकाबले तेज हो सकता है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट में निजी पूंजी के पक्ष में नहीं
Vinayak Chatterjee ने कहा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होनी चाहिए और इसमें निजी पूंजी को शामिल नहीं करना चाहिए।
उनका कहना है कि दुनियाभर में बड़े आर्थिक फायदे को ध्यान में रखकर शहरी ट्रांसपोर्ट को सरकारी मदद दी जाती है। इसलिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को केवल निवेश पर मुनाफा कमाने वाला कारोबार नहीं माना जाना चाहिए।
यह टिप्पणी Hyderabad Metro के संदर्भ में आई, जिसे Larsen & Toubro चला रही थी, लेकिन कम यात्री संख्या, बड़े कर्ज और रियल एस्टेट से कमाई में देरी जैसी समस्याओं के बाद इसे तेलंगाना सरकार को सौंप दिया गया।
हालांकि Chatterjee ने यह भी कहा कि एयरपोर्ट और हाईवे जैसे क्षेत्रों में भारत ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के जरिए काफी सफलता हासिल की है।