CNG में भी शुरू होगी ब्लेंडिंग, Bio-CNG मिलाने की तैयारी; कार मालिकों पर क्या होगा असर?

पेट्रोल में इथेनॉल के बाद अब CNG में भी ब्लेंडिंग का दौर शुरू होने वाला है। सरकार Bio-CNG की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ाएगी। ऐसे में CNG कार मालिकों के मन में माइलेज, परफॉर्मेंस और इंजन को लेकर सवाल हैं। जानिए आपकी कार पर इसका क्या असर पड़ सकता है।

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In Short

  • सरकार रेगुलर CNG में Bio-CNG की ब्लेंडिंग बढ़ाने की तैयारी में है, FY 2026-27 में लक्ष्य 3% रखा गया है।
  • Bio-CNG इस्तेमाल करने के लिए मौजूदा CNG कार के इंजन, टैंक या किट में बदलाव की जरूरत नहीं होगी।
  • इंडियन ऑयल के मुताबिक CBG की कैलोरिफिक वैल्यू CNG के करीब है, इसलिए माइलेज और परफॉर्मेंस में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है।

By Gaurav Kumar:

GOBARdhan Scheme: पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग के बाद अब सरकार CNG में भी बदलाव की तैयारी कर रही है। योजना है कि रेगुलर CNG में धीरे-धीरे Bio-CNG यानी कम्प्रेस्ड बायोगैस की हिस्सेदारी बढ़ाई जाए। इसके लिए केंद्र सरकार ने नेशनल सर्कुलर बायो-एनर्जी स्कीम–GOBARdhan को मंजूरी दी है, जिसके तहत 23,731 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

सरकार का लक्ष्य 2036 तक घरेलू CBG उत्पादन को करीब 10 गुना बढ़ाना है। इसके लिए खरीद की गारंटी, तय कीमत, कैपिटल सब्सिडी, पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंस से जुड़ी मदद दी जाएगी।

Bio-CNG आखिर बनती कैसे है?

Bio-CNG को जैविक कचरे से तैयार किया जाता है। इसमें खेतों से बचा अवशेष, पशुओं का गोबर, शुगर इंडस्ट्री का प्रेसमड, नगर निकायों का ऑर्गेनिक कचरा और दूसरे बायोमास का इस्तेमाल होता है।

प्रोसेसिंग के बाद तैयार गैस का स्ट्रक्चर रेगुलर CNG से काफी मिलता-जुलता है। यही वजह है कि इसे मौजूदा गैस नेटवर्क और CNG स्टेशनों के जरिए सप्लाई किया जा सकता है।

कितनी होगी Bio-CNG की ब्लेंडिंग?

सरकार की योजना के मुताबिक, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को एक तय मात्रा में Bio-CNG खरीदकर अपने गैस नेटवर्क में शामिल करना होगा।

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वित्त वर्ष 2026-27 में इसका लक्ष्य 3% रखा गया है। 2027-28 में इसे बढ़ाकर 4% और 2028-29 से 5% करने की योजना है। यह लक्ष्य सिर्फ गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली CNG पर नहीं, बल्कि CGD नेटवर्क से सप्लाई होने वाली CNG और PNG दोनों पर लागू होगा।

क्या CNG कार में करवाना होगा कोई बदलाव?

CNG कार मालिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ब्लेंडेड गैस इस्तेमाल करने के लिए इंजन या CNG किट में बदलाव करना होगा। मौजूदा जानकारी के मुताबिक, इसकी जरूरत नहीं होगी।

Bio-CNG और रेगुलर CNG का स्ट्रक्चर काफी हद तक एक जैसा है। इसलिए कार के इंजन, CNG टैंक या किसी दूसरे हार्डवेयर को बदलने की जरूरत नहीं बताई गई है।

माइलेज और परफॉर्मेंस पर क्या असर?

इंडियन ऑयल के मुताबिक, CBG की कैलोरिफिक वैल्यू करीब 52,000 kJ/kg है, जो CNG के आसपास है। इसलिए सामान्य परिस्थितियों में कार की परफॉर्मेंस या माइलेज में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है।

हालांकि, असली माइलेज गैस की क्वॉलिटी, वाहन की स्थिति, सड़क और ड्राइविंग स्टाइल जैसे कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है।

E20 से अलग क्यों है मामला?

पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग के दौरान पुराने वाहनों की कम्पैटिबिलिटी बड़ी चिंता रही है। लेकिन Bio-CNG और नेचुरल गैस के स्ट्रक्चर में समानता ज्यादा होने के कारण इसे मौजूदा CNG सिस्टम में शामिल करना आसान माना जा रहा है। यानी बदलाव कार के हार्डवेयर में नहीं, बल्कि फ्यूल के सोर्स में होगा।

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